छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ाई तेज होगी
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की महागंठबंधन सरकार की नीति उजागर हो गयी है. हालांकि सिविल सेवा 2022 परीक्षा की मेरिट सूची घोषित हुए एक साल बीत चुका है, लेकिन 623 अधिकारियों की नियुक्तियां अभी भी लंबित हैं। इससे विद्यार्थियों को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है और उनके भविष्य के साथ घोर अन्याय हो रहा है। इस प्रकार का आरोप राकांपा युवा कांग्रेस के मुंबई अध्यक्ष( शरद चंद्र पवार पार्टी) अमोल मटेले ने लगाया है.
अमोल मटेले ने यह भी कहा कि महायुति सरकार के दौरान महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की विश्वसनीयता पूरी तरह से खो गई है. कुप्रबंधन, अवैध हस्तक्षेप और निष्क्रियता ने छात्रों के अधिकारों को कमजोर कर दिया है।”
अमोल मटेले के नेतृत्व में लोक सेवा आयोग के सचिव का घेराव करने का निर्णय लिया गया है.
अमोल माटेले नेकहाकि, “राज्य सरकार को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करना चाहिए। 623 अभ्यर्थियों की नियुक्ति रोककर सरकार अपनी गैरजिम्मेदारी की पराकाष्ठा पर पहुंच गई है। हम सरकार और लोक सेवा आयोग को स्पष्ट चेतावनी दे रहे हैं. न्याय के लिए यह हमारी लड़ाई है. अगर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो छात्र सड़कों पर आंदोलन तेज करेंगे.छात्रों की मांग है कि 623 अधिकारियों की तुरंत नियुक्ति की जाए और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए. छात्रों को मानसिक एवं शारीरिक तनाव देने वाले भ्रम को समाप्त किया जाना चाहिए।एनसीपी युवा कांग्रेस इस घेराव आंदोलन के माध्यम से छात्रों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और गैर-जिम्मेदार सरकार को जवाबदेह ठहराएगी।”


