■ ‘एमएफएससीडीसी’ और ‘एफटीआईआई’ के बीच हुआ समझौता ज्ञापन।
मुंबई वार्ता संवाददाता

सांस्कृतिक कार्य विभाग और पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत ‘क्रिएटर्स इकोनॉमी’ के विकास के लिए कुशल मानव संसाधन के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। यह सहयोग की केवल शुरुआत है और आने वाले समय में महाराष्ट्र देश और दुनिया की क्रिएटर्स इकोनॉमी का केंद्र बनेगा, ऐसा विश्वास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्त किया।


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे और महाराष्ट्र फिल्म, रंगमंच एवं सांस्कृतिक विकास महामंडल (MFSCDC), मुंबई के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार, एफटीआईआई के अध्यक्ष एवं अभिनेता आर. माधवन, सांस्कृतिक कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, फिल्मसिटी की प्रबंध निदेशक स्वाती म्हसे-पाटील, एफटीआईआई के कुलगुरु धीरज सिंह, पीआईबी की महानिदेशक स्मिता वत्स शर्मा, राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रकाश मकदूम, एफटीआईआई के प्राध्यापक संदीप शहारे और सांस्कृतिक कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आज आम आदमी भी एक क्रिएटर बन गया है। उसने अपनी रचनात्मकता के बल पर एक स्वतंत्र स्पेस तैयार किया है और अब वह क्रिएटिव स्पेस मॉनेटाइज़ होने लगी है। इसलिए क्रिएटर्स इकोनॉमी आज की एक वास्तविक आवश्यकता बन गई है।उन्होंने बताया कि क्रिएटर्स इकोनॉमी का ग्राफ 92,000 करोड़ रुपये से बढ़कर केवल 100 दिनों में 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। इस तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण और तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन की अत्यधिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज के युग में प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) और प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) दोनों अनिवार्य हैं। कई लोगों के पास कौशल होते हुए भी प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण उन्हें व्यावसायिक अवसर नहीं मिलते। इस समझौते से युवाओं को प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र दोनों उपलब्ध होंगे।मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि एफटीआईआई और महाराष्ट्र सरकार के बीच यह सहयोग स्वागतयोग्य है। एफटीआईआई एक ऐसी संस्था है जिसने देश और दुनिया को गुणवत्तापूर्ण कलाकार दिए हैं, जबकि महाराष्ट्र की फिल्मसिटी व्यावसायिक सिनेमा की मजबूत आधारशिला है। इन दोनों मज़बूत इकोसिस्टम्स के एक साथ आने से एक तीसरा, और अधिक रचनात्मक तथा सशक्त इकोसिस्टम तैयार होगा।
सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट शेलार ने कहा कि एफटीआईआई की प्रवेश प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर की है। अब इस समझौता ज्ञापन के कारण महाराष्ट्र के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के विद्यार्थियों को राज्य स्तर पर प्रवेश की सुविधा मिल सकेगी। इससे गांव और तालुका स्तर के युवाओं को फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने का अवसर मिलेगा।उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में गोरेगांव, कोल्हापुर, प्रभादेवी और कर्जत में फिल्म से जुड़े चार प्रमुख केंद्र हैं। इस करार से महाराष्ट्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य के फिल्म शूटिंग लोकेशनों का प्रचार भी होगा।


