मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

छत्रपति संभाजीनगर लोक निर्माण विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया में एक बड़ी अनियमितता सामने आई है। पिछले दस वर्षों में, यह पता चला है कि वरिष्ठ और बर्खास्त कनिष्ठ लिपिकों ने मिलकर कार्यकारी इंजीनियरों के नकली हस्ताक्षरों का उपयोग करके लगभग ३१ लोगों को कांस्टेबल, चौकीदार और सफाई कर्मचारी के पदों पर नियुक्त किया है। वरिष्ठ क्लर्क का नाम अंकुश श्रीरंग हिवाले और बर्खास्त कनिष्ठ क्लर्क का नाम उज्ज्वला अनिल नरवड़े है। दोनों के खिलाफ वेदांतनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।
इस मामले में लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता शेषराव काशीनाथ चव्हाण ने शिकायत दर्ज कराई थी। तदनुसार, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, जालना और लातूर में २०१५ से २०२५ तक लोक निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के तहत चपरासी, चौकीदार, सफाई कर्मचारी के पदों पर ३१ लोगों को नियुक्त किया गया था। इन नियुक्तियों के लिए कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया था, न ही कोई आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों ने फर्जी नियुक्ति पत्रों के माध्यम से उम्मीदवारों को सरकारी सेवाएं प्रदान करने के लिए कार्यकारी इंजीनियरों के स्कैन किए गए या जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया।
१५ मई २०२५ को तत्कालीन कार्यपालक अभियंता अशोक येरेकर के आदेश पर एस. बी. बिहारे की अध्यक्षता में ६ सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। इस समिति में 3 उपयंत्री और 3 तकनीकी कर्मचारी शामिल थे। समिति ने वरिष्ठ लिपिक हिवाले को पिछले १० वर्षों के सभी नियुक्ति दस्तावेजों की जांच के लिए संबंधित दस्तावेज और मूल फाइलें जमा करने को कहा था। लेकिन उन्होंने इसे जमा नहीं किया और कार्यालय की अलमारी बंद रखी। जब अलमारी की जांच की गई और ताला खोला गया तो भर्ती प्रक्रिया के दस्तावेज गायब पाए गए।
इस मामले में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता शेषराव काशीनाथ चव्हाण ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, जालना और लातूर में लोक निर्माण एवं राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अंतर्गत चपरासी, चौकीदार और सफाई कर्मचारी के पदों पर २०१५ से २०२५ तक ३१ लोगों की नियुक्ति की गई।


