मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि दिवस के अवसर स्मरणांजलि समारोह का भव्य आयोजन दादर पूर्व के योगी सभागृह में शुक्रवार को किया गया।
इस अवसर पर सीमा एंड ग्रुप और टीना एंड ग्रुप द्वारा आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जन्म की झांकी भावों की भावांजलि के साथ प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा आचार्य विद्यासागर के फोटो के लोकार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ की गई।
इस मौके पर राज्यपाल के हाथों से राजस्थानी समाज के के सी जैन,श्रवण काला,अनिल,जोशी,विनय जैन, सुरेन्द्र पांड्या, जमनालाल,आदित्यपति,प्रकाश चावड़ा,मनोज चंद्र,अजीत पाटे, कासलीवाल,जाएं चंद्र, चंद्रप्रकाश,अशोक जैन,जयेश शाह, शांतिलाल,दीपक सावंत,जयेश एंड दीप्ति,सुरेन्द्र जैन समेत कई गणमान्य व्यक्तियों को स्मृति चिन्ह और फोटो प्रदान कर उनका स्वागत किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि संत विद्यासागर जी सिर्फ जैन धर्म नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जाति के संत थे,वे केवल राष्ट्र और राष्ट्रीय भाषा की बात करते थे।कुछ संत अपने आप में महान होते हैं ऐसे संत हर जगह नहीं मिलते हैं,विद्यासागर जी जीवदया प्रेमी थे।संत अशोक भैयाजी ने कहा कि त्याग, तपस्या और तीर्थ का नाम विद्यासागर है,भाषा भूषा और भोजन,अपराधमुक्तभारत,इंडिया नहीं भारत बोलो ये उनका सपना था।मोटा पहनो,मोटा खाओ,भारत को प्रतिभारत बनाओ यह विद्यासागर जी का संकल्प था.
पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि विद्यासागर जी के बारे कुछ बताना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है।उनके द्वारा बताए गए नवकार मंत्र का जाप करने से मनुष्य की हर समस्या दूर हो जाती है।भारत गौरव संत देवेंद्र जी महाराज ने कहा कि जैन समाज को पंथों में नहीं बटना चाहिए,सबके एक ही भगवान महावीर जी है और यही जैन समाज की पहचान है।
समारोह में राज्यपाल द्वारा संत विद्यासागर जी द्वारा रचित संस्कृत ग्रंथ मूक माटी और देवेंद्र ब्रह्मचारी के जीवन पर आधारित भारत गौरव पुस्तक का विमोचन भी किया गया, समारोह को महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री राजपुरोहित और फिल्म कलाकार पद्मश्री मनोज जोशी समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया। समारोह का संचालन प्रदीप बोहरा और अध्यक्षता तरुण काला ने की. समारोह का आयोजन महाविरायतन फाउंडेशन ने किया ।


