भिवंडी में भूमाफियाओं के अतिक्रमण के कारण कामवारी नदी का अस्तित्व को खतरा, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।

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मुंबई वार्ता संवाददाता।भिवंडी

भिवंडी के नदीनाका इलाके में कामवारी नदी के किनारे सरकारी जमीन पर भूमाफियाओ द्वारा अतिक्रमण कर दुकानों आदि का निर्माण धड़ल्ले से जारी है।सब कुछ जानकर भी स्थानीय प्रशासन पूरी तरह खामोश है। नदी के किनारे चादरें लगाकर खुलेआम कब्जा किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ पर्यावरण को खतरा है बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता भी उजागर हो रही है।

भिवंडी तालुका के कवाड़ क्षेत्र के पास स्थित देपिवली गांव से कामवारी नदी निकलती है।जो ग्रामीण इलाकों से होकर 32 किलोमीटर की यात्रा करती हुई मनपा सीमा से होकर बहती हुई वसई खाड़ी में मिल जाती है। नदी क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ गया है।स्थानीय शेलार गांव की सीमा में नदी एक नाले में तब्दील होती नजर आ रही है।

शेलार की सीमा के एक तरफ अमीनाबाग, म्हाडा कालोनी जैसे क्षेत्र है जहाँ नदी के तल भाग मे मनपा अधिकारियों की मिली भगत से कब्ज़ा कर ऊँची ऊँची ईमारते बन गयी है वही शेलार ग्रामपंचायत एवं खोनी सीमा क्षेत्र मे कपड़ो और धागो की रंगाई की कई कंपनियां है जहाँ कपडे एवं धागो के रंगने की प्रकिया होती है।जो केमिकल युक्त पानी को बिना फिल्टर किए ही नदी में छोड़ते है। वहीं नदी के पास बसा अत्तर पाड़ा ऐसा क्षेत्र है जहा बरसात मे पानी हर समय घरों मे घुस जाता है।

स्थानीय दबंग लोग नदी की तलहटी में पत्रों का पहले सेड डालकर जमीन पर कब्ज़ा करते है फिर बाद मे उसे पक्का बनाकर मजदूरों को भाड़े पर देकर भाड़ा वसूलते है।जिनके सामने स्थानीय प्रशासन भी लाचार नजर आता है।इतना ही नहीं वाडा रोड पर कामवाऱी नदी के पुल के पास शेलार ग्रामपंचायत हिस्से की तरफ खाली सरकारी जमीन पर भी दबंगो की गिद्ध दृष्टि पड़ी और देखते ही देखते दस दुकाने बनाकर दबंगो ने उसे भाड़े पर दे दिया। जिसकी शिकायत करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने बताया की जिस जमीन पर अवैध निर्माण कर जमीन पर कब्ज़ा किया गया है वहां कुछ दिन पहले सार्वजानिक शौचालय हुआ करता था जो जर्ज़र होकर ढह गया उसके बाद यह अतिक्रमण किया गया।

प्रशासन की नाक के नीचे हो रहे अतिक्रमण को जानबूझकर प्रशासन द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।बताया जाता है की शेलार ग्रामपंचायत के पास सौ एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन थी लेकिन आज ग्रामपंचायत के पास कुछ नया उपक्रम करना हो तों उसके पास खुद की जमीन ही नहीं बची है।सनद रहे शहर से सटा होने के कारण इस ग्रामीण पट्टे मे जमीन की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है जिसे सरकारी अधिकारियो की मिली भगत से स्थानीय दबंग लोग जमीन कब्ज़ा करने मे लगे है।

शेलार ग्राम पंचायत के प्रशासक सुधाकर सोनवणे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अवैध निर्माण की जानकारी सही पाई गई है, जिसके विरुद्ध कार्यवाई करने हेतु एमएमआरडीए, तहसीलदार और सार्वजानिक बांधकाम अभियंता को पत्र देकर सूचित कर दिया गया है।जिससे जल्द ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

इस संबंध मे जब तहसीलदार अभिजीत खोले से संपर्क किया गया तों पहले उन्होंने ग्रामविकास अधिकारी एवं प्रशासक द्वारा भेजे गए पत्र के मे अनभिज्ञता जताई। जब उन्हें बताया गया की पत्र दिया गया है जिसकी कॉपी हमारे पास है तों उन्होंने कहा की मुझे पत्र की कॉपी भेजिए मै देखूगा की निर्माण सार्वजानिक जगह पर है या किसी के नाम की जगह है। अगर सरकारी जमीन होंगी तों उचित कार्यवाई की जाएगी। लेकिन मिलने का समय मांगने पर मीटिंग का हवाला देते मिलने की असमर्थता जताई।

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