शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर देश, धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए आगे आएं युवा : भवानजी

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मुंबई वार्ता संवाददाता

वरिष्ठ भाजपा नेता और मुंबई के पूर्व उप महापौर बाबू भाई भवानजी ने कहा है कि आज की युवा पीढ़ी को छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर देश, धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए आगे आना चाहिए।

दादर में आज युवाओं की एक गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए भवानजी ने कहा कि बड़े मुश्किल समय में शिवाजी महाराज ने देश और धर्म को बचाने का काम किया था। यदि वे नहीं पैदा होते तो शायद आज हिंदुस्तान में हिंदुत्व का नाम ही मिट गया होता। आज की नई पीढ़ी को छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेकर देश, धर्म और संस्कृति को समृद्धि बनाने का काम करना चाहिए।

उधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मकर संक्रांति के मौके पर हरियाणा के पानीपत में हुंकार भरी। फडणवीस ने कहा कि पानीपत युद्ध में मराठे युद्ध नहीं हारे, तब जो मराठे लड़ रहे थे, उनकी ताकत थी। वो फिर उठ खड़े हो गए और दस साल के अंदर दिल्ली का तख्त फोड़ दिया। फडणवीस ने इस मौके पर कहा कि आप बैटल हारते हो तो हार नहीं होती लेकीन वार हारते हो तो हार होती है।

फडणवीस ने कहा कि 264 साल पहले पानीपत का युद्ध 1761 में लड़ा गया था। अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली ने अफवाह फैलाकर युद्ध जीता था। पानीपत की यह जमीन मराठाओं के खून से सिंचित है। फडणवीस ने कहा कि ये मराठा ही थे जिन्होंने न सिर्फ मुगलों को परास्त किया था बल्कि अपने देश की संस्कृति और हिंदुत्व को बचाते हुए हिंदी स्वराज की स्थापना की।**फडणवीस ने कहा कि भारत के इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज इकलौते ऐसे नायक है कि जिन्होंने देश का इतिहास बदल दिया।

फडणवीस ने कहा कि देश ऐसी अवस्था में था कि शायद हमसे से कोई हिंदू कहलाने लायक नहीं बचता। तब मां जिजाऊ ने ऐसे वीर पुत्र को जन्म दिया और कसम दी आंक्राताओं को हटाने का लक्ष्य दिया। मां भवानी देव देश और धर्म के लडूंगा। छत्रपति शिवाजी महाराज ने जाति-पाति विहीन ऐसी मावड़ों की सेना बनाई। उन्होंने मुगलों से लड़ाई लड़ी। छत्रपति शिवाजी ने मुगलों को पराजित करके स्वराज्य की स्थापना की।

फडणवीस ने कहा कि उसके बाद हमारा मराठा साम्राज्य रुका नहीं। छत्रपति संभाजी महाराज ने जिस प्रकार से लड़ते-लड़ते उसी दफन कराया।**फडणवीस ने कहा कि वीरों की भूमि महाराष्ट्र ने वीरता दिखाई। मराठाओं ने जब संस्कार, संस्कृति और हिंदुत्व पर हमला हो रहा था। देश में हमारे उपासना स्थलों को तोड़ा जा रहा था। तब मुगलों से लड़ाई लड़ी। फडणवीस ने कहा कि यह मराठाओं की देन है कि आगे चलकर बाजीराव पेशवा के काल में तो अटक से लेकर कटक तक हिदवी स्वराज्य का विस्तार कर देश, धर्म एवं संस्कृति रक्षण का कार्य किया।

फडणवीस ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने भगवा ध्वज के नीचे सबको एक साथ लाए। फडणवीस ने कहा कि आज आज हम सभी को भगवा ध्वज और तिरंगे के नीचे एक साथ आने की जरूरत है।पानीपत की शौर्य भूमि पर शौर्य के प्रतीक के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित करेंगे, ऐसा संकल्प मैं करता हूँ ।

फडणवीस ने पानीपत के ऐतिहासिक तृतीय युद्ध में शहीद जांबाज सैनिकों को 264वें शौर्य दिवस समारोह के नमन किया। उन्होंने वीर शहीद मराठा सैनिकों को पुष्पचक्र अर्पित कर अभिवादन किया। फडणवीस ने साल 2025 का सबसे पहला शौर्य पुरस्कार नितिन धांडे (अमरावती) को प्रदान किया। हिंदवी स्वराज्य के लिए समर्पित मराठों एवं क्रूर आक्रांता अहमद शाह अब्दाली की सेनाओं के बीच 14 जनवरी सन 1761 को पानीपत का तृतीय युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में मराठा वीरों ने खूब पराक्रम दिखाया था। आक्रांताओं की विशाल सेना के सामने मुट्ठी भर मराठा वीरों ने देश के लिए प्राण न्यौछावर किया। हिंदुओं के प्रमुख पर्व मकर संक्रांति पर 14 जनवरी 1761 को सेनापति सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व में मराठा और अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली सेना के बीच पानीपत के मैदान में जंग लड़ी गई थी।

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