मुंबई वार्ता/हरिशचंद्र पाठक

नेरुल के सिग्नल स्कूल में आदिवासी पारधी महासंघ और लक्ष्मी देवी आदिवासी पारधी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष एकनाथ पवार के नेतृत्व में 27 फरवरी को मराठी गौरव दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम सिर्फ़ एक सांस्कृतिक समारोह नहीं था, बल्कि एक अच्छी पहल भी थी जिसने पारधी समाज के बच्चों के टैलेंट और भाषाई जागरूकता को एक प्लेटफॉर्म दिया।


बता दें कि मराठी भाषा का सम्मानऔर जतन मराठी गौरव दिवस के मौके पर हुए कार्यक्रम में बच्चों में मराठी भाषा के प्रति प्रेम, गर्व और अपनत्व जगाने की कोशिश दिखाई दी। बच्चों के गीत और नाटक परफॉर्मेंस के ज़रिए भाषा के सौंदर्य, लय और सांस्कृतिक मूल्यों का बखूबी देखने को मिला।बच्चों द्वारा पेश किए गए गाने — “चल रे भोपल्या तुनुक तुनुक”, “एक होती भिंगरी”, “खोप्या माधे खोपा”, “सांग सांग भोलानाथ”, “छड़ी लगे छम छम”, “चांदोमामा चांदोमामा” — मराठी बालसाहित्य की समृद्धि परंपरा को अनोखे तरीके से दर्शाया गया । इन गानों ने बच्चों की बोलने की कला कौशल्य को बढ़ाया और उनका मनोबल बढ़ाया।


इस कार्यक्रम में पारधी भाषा के गीतों को शामिल करना एक खास बात थी। इससे बच्चों को अपनी मातृभाषा पर गर्व महसूस करने का मौका मिला और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का एक अच्छा संदेश समाज तक पहुंचा। इस पहल से मराठी के साथ-साथ पारधी भाषा को बचाने और बढ़ावा देने की जागरूकता दिखाई दी।सिग्नल स्कूल के इस कार्यक्रम के आयोजन के जरिए झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को शहर के शैक्षणिक और सांस्कृतिक माहौल से जोड़ने की कोशिश की गई। सामाजिक समावेश के जरिए यह कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संतोष एकनाथ पवार के मार्गदर्शन में पारधी समाज के बच्चों को एजुकेशन, कल्चर और कल्चरल जागरूकता की दिशा मिल रही है। इस प्रोग्राम में यह साफ दिखाई दिया कि उनके नेतृत्व में समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता देखने को मिल रही है।


