मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका द्वारा शहर और उपनगरों में 13 स्विमिंग पूलों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, लेकिन इन पूलों में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियमों के अनुसार, हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी पर तैरना होगा और किसी दुर्घटना की स्थिति में प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।फीस भरने के बावजूद यदि तैराकों को लाइफगार्ड और मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी—यह बड़ा सवाल बन गया है।


इन स्विमिंग पूलों में अब तक 1 लाख 39 हजार से अधिक लोगों का पंजीकरण हो चुका है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। सुरक्षा कर्मी मौजूद होने के बावजूद हादसों की घटनाएं सामने आई हैं।
पंजीकरण का विवरण:
सामान्य वर्ग: 78,769
विद्यार्थी: 45,903
वरिष्ठ नागरिक: 11,176
पालिका कर्मचारी: 2,550
दिव्यांग: 774
तैराकों की संख्या बढ़ाने के लिए बीएमसी ने 10 स्विमिंग पूलों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर निजी संस्थाओं को देने की योजना बनाई थी। दादर-वडाला क्षेत्र को छोड़कर बाकी पूलों को इस योजना में शामिल किया जाना था। इस मॉडल के तहत मुनाफा निजी संस्था और पालिका के बीच बराबर बांटा जाना था।
फिलहाल यह योजना लागू नहीं हो पाई है। बीएमसी इन पूलों के रखरखाव पर भारी खर्च कर रही है, लेकिन इसके मुकाबले पर्याप्त राजस्व नहीं मिल रहा, जिससे ये पूल घाटे में चल रहे हैं।
बीएमसी के प्रमुख स्विमिंग पूल:
कांदिवली (पश्चिम), चेंबूर, दादर (पश्चिम), मुलुंड (पश्चिम), अंधेरी (पश्चिम), दहिसर (पश्चिम), मालाड (पश्चिम), वडाला, गिल्बर्ट हिल (अंधेरी पश्चिम), वरली, विक्रोली, अंधेरी (पूर्व) और दहिसर (पूर्व)।इस पूरे मामले में सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग तेज हो गई है।


