● कांग्रेस पार्षदों का ज़मीन पर बैठकर विरोध.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका के सभागृह में बुधवार को महापौर पद पर रितु तावडे और उपमहापौर पद पर संजय घाड़ी का निर्विरोध चयन किया गया। इस अवसर पर नवनिर्वाचित 227 पार्षदों के साथ महापालिका सचिव विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। हालांकि, सभागृह में पर्याप्त जगह न होने के कारण भारी अव्यवस्था और हंगामा देखने को मिला।
बैठने की व्यवस्था न मिलने से नाराज़ कांग्रेस के पार्षदों ने सभागृह के भीतर ज़मीन पर बैठकर विरोध दर्ज कराया। आने वाले समय में 227 निर्वाचित सदस्यों के साथ 10 नामनिर्देशित पार्षद भी जुड़ने वाले हैं, जिससे जगह की समस्या और गंभीर होने की आशंका है।


इससे पहले भी नवी मुंबई महापालिका की तर्ज पर मुंबई महापालिका के लिए नए और बड़े सभागृह की मांग की जाती रही है, लेकिन उस पर अमल न होने से यह स्थिति पैदा हुई।मुंबई महापालिका की स्थापना 1872 में हुई थी और पहली सभा 4 सितंबर 1873 को हुई थी, तब पार्षदों की संख्या 64 थी। 2002 तक यह संख्या बढ़कर 227 हो गई, लेकिन सभागृह वही पुराना बना रहा।
बढ़ती सदस्य संख्या के बावजूद नए सभागृह के निर्माण को लेकर प्रशासन द्वारा लगातार उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। राजनीतिक शोर-शराबे के कारण इसका असर सीधे सभागृह की कार्यवाही पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।महापालिका मुख्यालय से सटी राज्य उत्पादन शुल्क विभाग की जमीन पर अथवा मुख्यालय के सामने स्थित क्रीड़ा भवन की जगह पर वैकल्पिक सभागृह बनाने को लेकर पहले चर्चा हुई थी। लेकिन ठोस निर्णय न होने के कारण उत्पादन शुल्क विभाग की इमारत वहां बन गई, जबकि क्रीड़ा भवन की इमारत के पुनर्विकास के तहत वहां आधुनिक टाउन हॉल और कैफे बनाए जाने की योजना है।
इस बीच उद्धवसेना की गुटनेता किशोरी पेडणेकर ने सभागृह में जगह की कमी से हुए हंगामे का संज्ञान लेने की मांग महापौर से की है। उन्होंने कहा कि भीड़भाड़ के कारण पार्षदों के स्वास्थ्य के साथ-साथ सभागृह की कार्यवाही भी प्रभावित हो सकती है। पेडणेकर ने क्रीड़ा भवन में वैकल्पिक सभागृह के निर्माण का प्रस्ताव जल्द पेश करने की बात कही है।


