मुंबई वार्ता संवाददाता

शहर में पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) के विस्तार को तेज करने के लिए मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने बड़े स्तर पर नियमों में ढील देने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य रसोई गैस (एलपीजी) से पीएनजी की ओर तेजी से संक्रमण सुनिश्चित करना है।पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से शहर में इसकी भारी कमी देखी जा रही है। इसके चलते राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, वहां के निवासियों को तीन महीने के भीतर एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट होना होगा।इस संदर्भ में बीएमसी के मुख्य अभियंता (सड़क एवं यातायात) गिरीश निकम द्वारा 30 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया गया।


इसके तहत जहां महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) पीएनजी प्रदाता है, वहां सभी लंबित और मौजूदा आवेदनों को “स्वतः स्वीकृत” माना जाएगा, जिससे तुरंत काम शुरू किया जा सके।नए आवेदनों के लिए भी सभी श्रेणी की सड़कों पर 24 घंटे के भीतर अनुमति देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा एमजीएल को वित्तीय शर्तों में भी बड़ी राहत दी गई है। कंपनी को 24 घंटे काम करने की अनुमति दी गई है और 30 जून तक मौसमी प्रतिबंधों में भी ढील दी गई है।अब पहले की तरह फायर विभाग और ट्रैफिक पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता भी हटा दी गई है। इसकी जगह केवल वार्ड कार्यालय को दैनिक सूचना देना पर्याप्त होगा।
गिरीश निकम के अनुसार, “हम चाहते हैं कि एमजीएल तुरंत काम शुरू करे, इसलिए सभी औपचारिकताएं हटा दी गई हैं। डिमांड नोट बाद में भी निपटाया जा सकता है। यदि कंपनी सड़क की मरम्मत करने को तैयार है, तो उसे अग्रिम शुल्क देने की जरूरत नहीं है।”पहले डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (डी एल पी)यानी सड़क निर्माण के बाद तीन साल की अवधि के दौरान खुदाई के लिए मुख्य अभियंता की अनुमति जरूरी होती थी, लेकिन अब इस नियम में भी ढील दी गई है। अब वार्ड अधिकारी और सहायक अभियंता (सड़क) डी एल पी और नॉन- डी एल पी दोनों सड़कों पर निर्णय ले सकेंगे।
बीएमसी के अनुसार, H- पश्चिम वार्ड में करीब 10 लंबित आवेदन स्वतः स्वीकृत किए जा चुके हैं। वहीं F- दक्षिण वार्ड में सर्कुलर जारी होने के बाद तीन नए आवेदन मिले हैं, जिनमें से एक पर काम शुरू हो चुका है और बाकी दो पर जल्द काम शुरू होगा।


