मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में फुटपाथ विक्रेताओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने या जुर्माना वसूलने तक सीमित नहीं रही है। अब बड़ी संख्या में विक्रेताओं के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, जिससे हजारों अनौपचारिक कामगार आपराधिक न्याय प्रणाली के दायरे में आ रहे हैं। इससे उनके रोजगार, आवाजाही और पहचान पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


उत्तर मुंबई के जोन 11 और जोन 12 के आंकड़े इस सख्ती की तस्वीर साफ करते हैं।
■ जोन 11 में कार्रवाई
वर्ष 2025 और 2026 में मिलाकर कुल 9,858 विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया गया, जबकि 511 मामलों में आपराधिक केस दर्ज किए गए।सिर्फ 2026 में ही 2,459 विक्रेताओं पर जुर्माना और 293 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।सबसे ज्यादा कार्रवाई बोरीवली क्षेत्र में हुई, जहां दो वर्षों में 241 मामले दर्ज किए गए।
■ जोन 12 में कार्रवाई
2025 और 2026 के दौरान कुल 7,496 विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया गया और 133 मामलों में केस दर्ज हुए।2026 में अब तक 589 विक्रेताओं पर जुर्माना और 60 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।समता नगर और दहिसर पुलिस थाने कार्रवाई के मामले में सबसे सक्रिय रहे।
हॉकर यूनियनों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है और इसमें पहचान के आधार पर चुनिंदा वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि शहर की बहुप्रतीक्षित हॉकर नीति अब भी कानूनी और प्रशासनिक उलझनों में फंसी हुई है, जिसके चलते स्पष्ट दिशा-निर्देश के अभाव में सख्ती बढ़ाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आपराधिक मामले दर्ज होने से इन कामगारों के लिए भविष्य में लाइसेंस, बैंकिंग सेवाएं और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेना मुश्किल हो सकता है। वहीं, प्रशासन का तर्क है कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखना और यातायात सुचारु बनाए रखना जरूरी है।
फिलहाल, मुंबई में फुटपाथ विक्रेताओं पर कार्रवाई का यह नया रुख शहर की आजीविका बनाम कानून व्यवस्था की बहस को और तेज कर रहा है।


