मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई पुलिस ने एक बड़े और संगठित मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 17 वर्षीय नाबालिग को मुक्त कराया है। आरोप है कि इस गिरोह ने बच्चे का अपहरण कर उसे जबरन ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए मजबूर किया और उससे भीख मंगवाने व शारीरिक शोषण के जरिए पैसे कमाए।इस मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों सफेद आलम उर्फ जारा अख्तर खान और बाबू गुरु को गिरफ्तार किया है।


पीड़ित किशोर गोवंडी का निवासी है। 10वीं पास करने के बाद वह परिवार की आर्थिक मदद के लिए वाशी में मोबाइल रिपेयर की दुकान पर काम करने गया था।फरवरी 2026 में उसका बड़ा भाई उसे छेड़ा नगर सिग्नल पर महिलाओं के कपड़ों में ट्रांसजेंडर समूह के साथ खड़ा देखकर चौंक गया।
पूछताछ पर उसने पहले काम पर होने की बात कही, लेकिन उसी दिन घर नहीं लौटा और फोन बंद कर लिया।मां ने रफीक नगर इलाके में तलाश शुरू की, जहां लोगों ने उसे आरोपी बाबू गुरु के ठिकाने तक पहुंचाया। आरोपी, जिसे इलाके में “गुरु मां” के नाम से जाना जाता है, ने महिला को धमकाया।बाद में मां को बेटा बाबा नगर में मिला, जिसके बाद उसे सुरक्षा के लिए वाराणसी भेज दिया गया। लेकिन 8 मार्च को वह वहां से भी गायब हो गया और चोलापुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
कुछ समय बाद आरोपी जारा का फोन आया कि लड़का फिर उनके पास है। जब मां मुंबई पहुंची तो उसने बेटे को फिर महिलाओं के कपड़ों में और डरा-सहमा पाया।जांच में सामने आया कि 10 मार्च से 1 अप्रैल के बीच नाबालिग को बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उससे लोकल ट्रेनों और शहर के विभिन्न सिग्नलों पर भीख मंगवाई गई। उसकी कमाई पूरी तरह आरोपियों द्वारा रख ली जाती थी।इसके अलावा, उसे जीएम लिंक रोड और छेड़ा नगर इलाके में पुरुषों के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी मजबूर किया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बाबू गुरु कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक है और पिछले 30 वर्षों से फर्जी दस्तावेजों—जैसे जन्म प्रमाणपत्र, आधार और पैन कार्ड—के जरिए भारत में रह रहा था।गिरोह का नेटवर्क मुर्शिदाबाद सीमा के जरिए बांग्लादेश से लोगों की अवैध घुसपैठ करवाकर कोलकाता में ठिकानों तक पहुंचाने और फिर मुंबई लाने का काम करता था।
मुंबई में इन लोगों को शिवाजी नगर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में रखा जाता था और उनसे 5,000 से 10,000 रुपये तक किराया वसूला जाता था।
मुंबई पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अन्य नाबालिग भी इस तरह के “जबरन परिवर्तन” और तस्करी का शिकार हुए हैं।


