मुंबई, यश भारत

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के तहत संचालित चार प्रमुख अस्पतालों के करीब 3,000 रेजिडेंट डॉक्टरों ने महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ोतरी लागू न होने पर 10 अप्रैल से विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। डॉक्टरों का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्वीकृत डीए वृद्धि अब तक लागू नहीं की गई, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


रेजिडेंट डॉक्टरों के अनुसार, राज्य सरकार ने डीए में क्रमशः 1 जुलाई 2024 से 12%, 1 जनवरी 2025 से 11% और 1 जुलाई 2025 से 8% की बढ़ोतरी मंजूर की थी। इसके बावजूद इन संशोधनों का लाभ उन्हें नहीं मिला, जिससे स्वीकृत और वास्तविक भुगतान के बीच करीब 31% का अंतर बन गया है।वर्तमान में डॉक्टरों को करीब 21 महीने पुराने दरों के अनुसार ₹2,500 से ₹3,000 प्रतिमाह डीए मिल रहा है, जबकि संशोधित दर के अनुसार यह ₹3,000 से ₹3,960 होना चाहिए।
डॉक्टरों ने बकाया (एरियर) भुगतान की भी मांग की है, जो प्रति व्यक्ति लगभग ₹50,000 तक बनता है।महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (मार्ड), जो केईएम अस्पताल, नायर अस्पताल, सियॉन अस्पताल और कूपर अस्पताल के पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करता है, ने 6 अप्रैल को नगर आयुक्त अश्विनी भिडे और महापौर रीतु तावड़े को पत्र लिखकर तुरंत संशोधित डीए लागू करने और 21 महीनों का बकाया देने की मांग की है।
यह मुद्दा अतिरिक्त नगर आयुक्त विपिन शर्मा और उपमहापौर संजय घाडी के समक्ष भी उठाया गया है। अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
मार्ड के महासचिव डॉ. अमर आगामे ने कहा, “हम कोई अतिरिक्त मांग नहीं कर रहे हैं, सिर्फ वही चाहते हैं जो सरकार पहले ही मंजूर कर चुकी है। यह मुद्दा केवल पैसे का नहीं, बल्कि रेजिडेंट डॉक्टरों की गरिमा से भी जुड़ा है।”लगातार बैठकों के बावजूद समाधान नहीं निकलने से डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ रही है। 9 अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक और बैठक प्रस्तावित है।यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो डॉक्टर 10 अप्रैल से काली पट्टी बांधकर काम करते हुए विरोध शुरू करेंगे। इसके बाद यह आंदोलन सामूहिक अवकाश या हड़ताल में भी बदल सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस देरी का असर उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ रहा है। सियॉन अस्पताल की एक रेजिडेंट डॉक्टर ने बताया कि आर्थिक अनिश्चितता के कारण मानसिक तनाव बढ़ गया है और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। कई डॉक्टर EMI और अन्य खर्चों को लेकर भी जूझ रहे हैं।बीएमसी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।


