■ राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात कर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की मांग।
मुंबई वार्ता संवाददाता

निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर कई राज्यों से चिंता व्यक्त की गई है। शिकायतें मिल रही हैं कि जानबूझकर कुछ विशेष जातियों और धर्मों के मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कुछ राज्यों में चुनाव से ठीक पहले किए गए एसआईआर अभियान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। यह भी देखा गया है कि यह अभियान सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इसलिए महाराष्ट्र में होने वाले एसआईआर अभियान को बिना किसी जल्दबाजी के निष्पक्ष रूप से लागू किया जाए, ऐसी मांग कांग्रेस पार्टी ने की है। यह जानकारी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दी।


कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने आज राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य नसीम खान, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व तेलंगाना के सह-प्रभारी सचिन सावंत, प्रदेश महासचिव एड. संदेश कोंडविलकर, प्रदेश महासचिव अभिजीत सपकाल आदि उपस्थित थे।


इस मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महाराष्ट्र में वर्ष 2002-04 के दौरान एसआईआर प्रक्रिया चलाई गई थी और यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी जल्दबाजी के लगभग 13 महीनों में पूरी की गई थी। अब 25 साल बाद जब यह प्रक्रिया फिर से की जा रही है, तो मतदाताओं की संख्या में साढ़े तीन करोड़ की वृद्धि को ध्यान में रखते हुए इसकी योजना बनाई जानी चाहिए। महाराष्ट्र में अगले 2-3 वर्षों में कोई चुनाव नहीं है, इसलिए यह प्रक्रिया डेढ़ से दो साल चले तो भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पर्याप्त समय देकर प्रक्रिया पूरी करने से जनता में संदेह की भावना नहीं रहेगी। जनगणना और एसआईआर एक ही अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नहीं करवाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को एसआईआर की सॉफ्ट कॉपी, ओसीआर या मशीन रीडेबल फॉर्मेट के साथ-साथ हार्ड कॉपी भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। एसआईआर पर आपत्ति दर्ज करने तथा नोटिस का जवाब देने के लिए कम से कम एक महीने का समय दिया जाना चाहिए।
सपकाल ने आगे कहा कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसका पक्ष सुनने के लिए कम से कम सात दिन का नोटिस देना अनिवार्य होना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बीएलओ किसी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दबाव में काम न करें तथा बीएलए पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। एसआईआर प्रक्रिया का पूरा डेटा कम से कम पांच वर्षों तक ईआरओ.और डीईओ स्तर पर सुरक्षित रखा जाए और आवश्यकता अनुसार राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराया जाए।फॉर्म 7 के आवेदनों की सख्ती से जांच की जानी चाहिए।
‘अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत’ के रूप में चिन्हित मतदाताओं की सूची मतदान केंद्र स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को समय पर दी जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि नागरिकता सिद्ध करने या एनआरसी को पीछे के दरवाजे से लागू करने जैसी कोई प्रक्रिया न हो। यह प्रक्रिया केवल मतदाता पंजीकरण तक सीमित रखी जाए। साथ ही, चुनाव की घोषणा के बाद पंजीकरण प्रक्रिया को रोक दिया जाना चाहिए—ऐसी मांगें इस दौरान की गईं, ऐसा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बताया।


