
श्रीश उपाध्याय/मुंबई
कहावत है ना कि आपके कर्म-कुकर्म आज नहीं तो कल आपके सामने आते हैं. आजकल यही हो रहा है चांदीवली के शिवसेना विधायक एवं उम्मीदवार दिलीप लांडे के साथ.


चांदीवली विधानसभा से शिवसेना विधायक दिलीप लांडे कुछ साल पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पदाधिकारी थे. उस समय उत्तर भारतीयों के खिलाफ मनसे के आंदोलन के दौरान लांडे ने भी उत्तर भारतीय फेरीवालों और टैक्सी चालकों को जमकर पीटा था. इस विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अब दिलीप लांडे को उन्हीं उत्तर भारतीयों के दरवाजे पर दस्तक देना पड़ रहा है.


यह बात जगजाहिर है कि वर्ष 1999 से 2019 तक विधायक और मंत्री रहने वाले कॉंग्रेस पार्टी के उम्मीदवार नसीम खान ने हमेशा उत्तर भारतीयों के हित को ध्यान में रखा. जब भी जरूरत पड़ी नसीम खान ने उत्तर भारतीयों के लिए सड़क से विधानसभा तक आवाज उठाई.
यह भी जगजाहिर है कि गत पांच वर्षो के कार्यकाल के दौरान विधायक रहते हुए दिलीप लांडे ने उत्तर भारतीयों को खेत की मूली से ज्यादा समझा ही नहीं.
चांदीवली विधानसभा का पूरा स्वाभिमानी उत्तर भारतीय समाज नसीम खान के साथ खड़ा है. हालाकि कुछ तलवे चाटने वाले, उत्तर भारतीयों की पिटाई का मंजर भूल चुके स्वार्थ में अंधे, उत्तर भारतीय दिलीप लांडे के साथ नजर आ रहे हैं. हालाकि उनकी संख्या नगण्य है.


पूरे चांदीवली विधानसभा में आज पूरे दिन उत्तर भारतीयों को दिलीप लांडे द्वारा लात मार कर पीटे जाने की फोटो वायरल होती रही. यह यादगार तस्वीर दिलीप
लांडे के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है. क्योंकि चांदीवली विधानसभा में इस बार वहीं जीतेगा जिसके साथ उत्तर भारतीय खड़ा रहेगा.


