उत्तर भारतीय संघ है या उत्तर भारतीय सिंह संघ प्राइवेट लिमिटेड ?

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मुंबई वार्ता

मुंबई के बांद्रा इलाके से क्रियान्वित उत्तर भारतीय संघ की गतिविधियों को ध्यान से देखेंगे तो यह किसी विशेष समाज के लिए ही अग्रसर नजर आता है।

ज्ञात हो कि पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह को जौनपुर से भाजपा ने उम्मीदवार बनाया। उस समय उत्तर भारतीय संघ ने कृपाशंकर सिंह का मनोबल बढ़ाया और कुछ रुपयों की चुनावी मदद भी की। करना भी चाहिए था।

उत्तर भारतीय संघ द्वारा लगातार उत्तर भारतीय नेताओं का सम्मान समारोह आयोजित किया जाता रहा है। लेकिन अगर आप ध्यान देंगे तो मालूम होगा कि सभी सम्मान समारोह किसी न किसी सिंह समाज के राजनेताओं का ही किया गया है।

यह बात इसलिए सही साबित होती है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में मुंबई के बोरीवली से संजय उपाध्याय और वसई विधानसभा से बाहुबली हितेंद्र ठाकुर को पटकनी देने वाली स्नेहा पंडित दुबे को आज तक उत्तर भारतीय समाज संघ ने सम्मान करने लायक नहीं समझा है।

अगर पाठकों को याद हो तो, यही उत्तर भारतीय संघ सिंह समाज के नेताओं की विजय पर किस कदर चरण-चापन करते हुए सम्मान समारोह आयोजित करता रहा है। और बाकी का यादव, मौर्या, ब्राम्हण, हरिजन समाज उन सभी सिंह समाजी नेताओं के सम्मान में शामिल होते समय यह मानता रहा कि कार्यक्रम उत्तर भारतियों का है। उत्तर भारतीय संघ ने भी उत्तर भारतीयों का ठेकेदार बनते हुए दो बार अपने पदाधिकारियों को विधानसभा चुनाव भी लड़ाया । हालाकि दोनों ही बार जनता ने उन्हें नकार दिया।

उत्तर भारतीय संघ के पूर्व अध्यक्ष बाबू आर एन सिंह के विधायक बनने पर पूरा उत्तर भारतीय समाज हर्षित हुआ था इस बात से अनजान रहते हुए कि उत्तर भारतीय संघ सिर्फ एक ही समाज की बेहतरी के लिए काम कर रहा है। उनके रहते यह भेदभाव नजर भी नहीं आता था।

हमेशा उत्तर भारतीय सिंह समाजी नेताओं का सम्मान करने में अग्रणी उत्तर भारतीय संघ ने आज तक मुंबई में पत्रकार से भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद तक पहुंचे प्रेम शुक्ल और राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त कर चुके अमरजीत मिश्रा का भी सम्मान नहीं किया है।

श्री सिद्धिविनायक मंदिर के कोषाध्यक्ष पद पर पदासीन हुए आचार्य पवन त्रिपाठी भी उन्हें दिखाई नहीं दिए होंगे।

शायद उत्तर भारतीय संघ प्रेम शुक्ल, संजय उपाध्याय, स्नेहा पंडित दुबे,अमरजीत मिश्रा,पवन त्रिपाठी को उत्तर भारतीय नहीं मानता है। हालाकि कई बार संघ द्वारा आयोजित समारोहों में अधिकतर प्रेम शुक्ल और संजय उपाध्याय,अमरजीत मिश्रा, पवन त्रिपाठी ने उपस्थिति दर्ज करायी है।

उत्तर भारतीय ब्राम्हण समाज के नेताओं के सम्मान समारोह हेतु उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर एन सिंह से चर्चा भी हुई लेकिन हर बार- हाँ भाई साहब, जी भाई साहब से आगे बात बढ़ी ही नहीं।

इस लेख के माध्यम से उत्तर भारतीय संघ कार्यकर्ताओं को यह बताने की कोशिश की गई है कि अगर संघ सिर्फ सिंह समाज के लिए ही क्रियान्वित है तो क्यों न उत्तर भारतीय संघ का नाम बदलकर उत्तर भारतीय सिंह संघ प्राइवेट लिमिटेड कर दिया जाए ? और अगर ऐसा है तो बाकी समाज के लोग उत्तर भारतीय संघ में क्या सिर्फ आयोजनों में भीड़ बढ़ाने और पूरी-भाजी खाने के लिए जाते है?

सवाल थोड़ा तीखा हैं लेकिन पूरे उत्तर भारतीय समाज का ठेका लेकर सिर्फ एक समाज को बढावा दिया जायेगा तो किसी न किसी को काग़ज़ काला करना ही होगा।

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