मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

एसीबी ने राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाकर रिश्वत लेने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
दो दिन पहले छत्रपति संभाजीनगर में रेजिडेंट डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई की गई थी और उन्हें ५ लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था। इस बीच, रत्नागिरी जिले में राजस्व विभाग के तीन लोगों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया गया है।
एक ओर जहां एसीबी ने राज्य में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर सीबीआई ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
सीबीआई ने मुंबई के लोअर परेल में पासपोर्ट कार्यालय के एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर रिश्वतखोरों को करारा झटका दिया है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लोअर परेल में पासपोर्ट सेवा केंद्र के एक कार्यालय सहायक और एक दलाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है। उन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट जारी करने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है।
आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई पासपोर्ट बनाने का आरोप है। इसके अलावा, सीबीआई को ७ फर्जी पासपोर्ट आवेदन मिले हैं। फिलहाल उनकी जांच चल रही है। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम जूनियर पासपोर्ट सहायक अक्षय कुमार मीना और दलाल भावेश शांतिलाल शाह हैं। मीना जूनियर पासपोर्ट असिस्टेंट है और लोअर परेल स्थित पासपोर्ट असिस्टेंट सेंटर में वेरिफिकेशन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थी।
सीबीआई ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। दोनों पर पासपोर्ट बनवाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है। सीबीआई ने मामले की आगे जांच की। उस समय उनके हाथ अहम जानकारी लगी। आरोपियों को मुंबई की विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें ५ दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।


