मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

सिडको में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप अक्सर सुनने को मिलते रहते हैं. सिडको में भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण सामने आया है. एक ऐसी घटना घटी है जिसमें सिडको के एक कर्मचारी ने रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित अधिकारी से रिश्वत मांगी. पुलिस ने रिश्वत लेने वाले कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया है.


शुक्रवार रात को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जाल बिछाकर नरेंद्र हीरे को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. चौंकाने वाली बात यह है कि हीरे सिडको कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हैं.सिडको के कार्यकारी अभियंता कल्याण पाटिल को कुछ महीने पहले रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था. इस घटना के बाद सिडको प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था और उनके खिलाफ खातावार जांच शुरू कर दी थी. नरेंद्र हीरे ने कल्याण पाटिल पर खुद को दोषमुक्त करने या इस जांच से मदद लेने का दबाव बनाया था और ₹ १.५ लाख की रिश्वत मांगी थी. हालांकि पाटिल रिश्वत नहीं देना चाहते थे और उन्होंने इस संबंध में एसीबी से शिकायत की थी.
पाटिल की शिकायत के बाद एसीबी नवी मुंबई इकाई ने शुक्रवार को सिडको मुख्यालय में जाल बिछाया। योजना के अनुसार पाटिल ने हिरे को पैसे दिए और उसी समय एसीबी के अधिकारी हरकत में आए और नरेंद्र हिरे को रंगे हाथों पकड़ लिया। इस चौंकाने वाली कार्रवाई से पूरे सिडको प्रशासन और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
यूनियन अध्यक्ष के भ्रष्टाचार में उजागर होने से कर्मचारी यूनियनों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने सीबीडी बेलापुर थाने में नरेंद्र हिरे के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम १९८८ (संशोधित २०१८) के तहत मामला दर्ज किया है। हिरे ने अपने द्वारा बताए गए सिडको के दो और कर्मचारियों के नाम लिए और कुल ४.५ लाख रुपए की मांग की। पुलिस जांच कर रही है।
हिरे को कोर्ट में पेश किया जाएगा और उसकी एसीबी हिरासत मांगी जाएगी ताकि पता चल सके कि उसके और कोई साथी इसमें शामिल हैं या नहीं।


