मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

मुंबई में बड़े पैमाने पर मनाए जाने वाले गणेशोत्सव के लिए, मूर्तिकारों को ज़्यादा से ज़्यादा पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियाँ बनानी चाहिए। बृहन्मुंबई नगर निगम ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की हैं। मनपा ने यह व्यवस्था की है कि नागरिक पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियाँ खरीदें। इस पहल के तहत, इस वर्ष मूर्तिकारों को ९९० टन शाडू मिट्टी मुफ़्त दी गई है। इसके अलावा, 1022 मूर्तिकारों को मूर्तियाँ बनाने हेतु मंडप बनाने हेतु मुफ़्त जगह भी उपलब्ध कराई गई है।


इस वर्ष प्रायोगिक तौर पर मूर्तिकारों को प्राकृतिक रंग भी वितरित किए गए हैं।पर्यावरण संरक्षण के लिए, अब मुंबईवासियों को भी ज़्यादा से ज़्यादा पर्यावरण-अनुकूल शाडू मिट्टी की मूर्तियाँ खरीदनी चाहिए और उन्हें स्थापित करके त्योहार के बाद कृत्रिम तालाब में मूर्तियों का विसर्जन करना चाहिए। इसके लिए, बृहन्मुंबई नगर निगम ने इस वर्ष २७५ से अधिक कृत्रिम तालाब बनाए हैं। बृहन्मुंबई नगर निगम प्रशासन ने मुंबईवासियों से इन कृत्रिम तालाबों में मूर्तियों का विसर्जन करने की अपील की है।


गौरतलब है कि वर्ष २०२४ में २०० से अधिक मूर्तिकारों को ५०० टन शाडू मिट्टी निःशुल्क प्रदान की गई थी। इसकी तुलना में, इस वर्ष, अप्रैल २०२५ से, मूर्तिकारों ने पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियाँ बनाने के लिए शाडू मिट्टी की भारी माँग दर्ज की है और उल्लेखनीय है कि नगर निगम ने उनकी माँग पूरी कर दी है। इस वर्ष माँग करने वाले मूर्तिकारों की संख्या ५०० से अधिक है। नगर निगम ने पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दोगुनी मात्रा में शाडू मिट्टी (९९० टन से अधिक) वितरित की है।
बृहन्मुंबई नगर निगम ने यह पहल इसलिए लागू की है ताकि मुंबई का पर्यावरण और जन-जीवन सुरक्षित रहे, त्योहार और उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाए जाएँ और प्राकृतिक संसाधनों की भी रक्षा हो। मूर्तिकारों ने नगर निगम के इन प्रयासों की सराहना की है।


