मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

आपदा विषयक वैश्विक उपाय अपनाकर मुंबई को और अधिक सुरक्षित व सक्षम बनाना ही महानगरपालिका की प्राथमिकता। ‘नागरी आपदा जोखिम क्षमता’ कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी ने यह विचार व्यक्त किया।


तीन दिवसीय कार्यशाला में विश्वभर के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की उपस्थितिप्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं का सामना करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका सदैव तैयार और सक्षम है। आपदा निवारण के अंतर्गत जोखिम कम करने के लिए नदी पुनरुद्धार योजना, ब्रिमस्टोवड प्रकल्प, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।


गगराणी ने कहा कि जोखिम कम करने के लिए विश्वभर में हो रहे अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और उपाय अपनाकर मुंबई और मुंबईकरों को और अधिक सुरक्षित व सक्षम बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है।बृहन्मुंबई महानगरपालिका और संयुक्त राष्ट्र संघ का आपदा जोखिम निवारण कार्यालय (UNDRR) के संयुक्त तत्वावधान में ‘नागरी आपदा जोखिम क्षमता’ (Urban Disaster Risk Resilience) विषय पर 8 से 10 सितंबर 2025 तक तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई ।
इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अमित सैनी, अतिरिक्त आयुक्त (प्रकल्प) श्री अभिजीत बांगर, मुंबई शहर की जिलाधिकारी श्रीमती आंचल सूद गोयल, UNDRR ग्लोबल एजुकेशन एवं ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के प्रमुख श्री संजय भाटिया, कार्यक्रम प्रबंध अधिकारी श्रीमती मुतालिका प्रुक्सापैंग, इंचाव एन्वायरनमेंटल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. गाइवून कोई, KPMG के भागीदार एवं सरकारी व सार्वजनिक सेवा प्रमुख श्री नीलाचल मिश्रा सहित कई मान्यवर और मुंबई महानगर क्षेत्र की विभिन्न सरकारी व अर्ध-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।उद्घाटन सत्र में विभिन्न मान्यवरों ने आपदा की स्थिति और जोखिम कम करने पर अपने विचार व्यक्त किए।
प्रमुख मार्गदर्शन में गगराणी ने कहा कि महानगरपालिका को आपदा प्रबंधन का लंबा अनुभव है और सर्वोत्तम उपाय लागू करने का विश्वास है। लेकिन केवल इतना ही काफी नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर की रणनीतियां, अनुसंधान और तकनीक का उपयोग करना आवश्यक है। समय पर उपाय से नुकसान कम किया जा सकता है और आपदाओं को टाला भी जा सकता है। मुंबई ने कई आपदाओं का सामना किया है और हर बार मुंबईकरों की हिम्मत, अनुशासन और एकजुटता सराहनीय रही है। संकट की घड़ी में भी यहां चोरी, लूटपाट या अत्याचार जैसी घटनाएं नहीं होतीं।
मिश्रा ने कहा कि आपदा की स्थिति में जोखिम की सीमा को समझना, प्रशासन के प्रयासों को जानना, आधारभूत ढांचे में निवेश करना और पूर्व तैयारी करना बेहद जरूरी है। इससे न केवल जानमाल का नुकसान रोका जा सकता है, बल्कि वित्तीय हानि और ढांचे को होने वाले नुकसान से भी बचाव होता है।
भाटिया ने कहा कि बदलते वातावरण और बढ़ती आबादी के चलते भविष्य की आपदाओं के लिए अभी से उपाय करना जरूरी है। जोखिम कम करने के प्रयास दरअसल भविष्य की वित्तीय हानि रोकने जैसे हैं। इसलिए शहरों को जोखिम-सक्षम (Resilient) बनाने के लिए यह निवेश समझकर काम करना चाहिए।कार्यशाला का प्रास्ताविक श्री अभिजीत बांगर ने किया और आभार श्री शरद उघड़े (उप आयुक्त, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन) ने व्यक्त किया।कार्यशाला में श्री भाटिया ने ‘मेकिंग सिटीज रेजिलिएंट – 2030’ पर मार्गदर्शन दिया।
बीएमसी आपदा प्रबंधन निदेशक महेश नार्वेकर ने ‘मुंबई की आपदाएं और उपाय’ विषय पर जानकारी दी।


