मुंबई वार्ता संवाददाता/भिवंडी

भिवंडी मनपा निर्माण विभाग हर साल करोड़ों रुपये सड़क मरम्मत, गटर निर्माण और पेवर ब्लॉक लगाने पर खर्च करता है। बावजूद इसके, हकीकत यह है कि सड़कें मरम्मत के कुछ घंटों बाद ही उखड़ जाती हैं और गटर-पेवर ब्लॉक का काम महीनों तक अधूरा पड़ा रहता है।


हैरत की बात यह है कि इन योजनाओं पर सांसद और विधायकों की निधि भी झोंकी जा रही है, जबकि शहर के स्कूल, अस्पताल और अन्य मूलभूत सुविधाएं लगातार जर्जर हालत में पहुंच रही हैं। शहर का परशुराम टावरे स्टेडियम, मनपा के गार्डेन, सरकारी दवाखाना, इंदिरा गांधी अस्पताल और ईदगाह तालाब जैसे सार्वजनिक स्थल अस्तित्व खोने की कगार पर हैं। प्रभाग समिति क्रमांक 4 का अंजंठा कंपाउंड इसका जीता-जागता सबूत है, जहां सड़क और गटर वर्षों से अधूरे पड़े हैं।


मनपा की आर्थिक तंगी का आलम यह है कि अब न तो गटर बनाने के लिए पैसे बचे हैं और न ही विकास कार्य शुरू करने की क्षमता। अंजंठा कंपाउंड में टूटी गटर लाइन से गंदा पानी लगातार सड़कों पर बहता रहता है। इसी क्षेत्र में मस्जिद भी स्थित है, जहां आने-जाने वाले लोगों को इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस क्षेत्र से भाजपा विधायक महेश चौघुले लगातार तीन बार चुने गए, लेकिन सड़कों और गटर की स्थिति पहले से भी खराब हो चुकी है। स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि लोग अब इस क्षेत्र से पलायन कर रहे हैं और इलाका धीरे-धीरे उजाड़ नजर आने लगा है। गुरुवार को टूटी सड़क पर एक टेंपो गटर में फंस गया और बड़ा हादसा होते-होते बचा।
स्थानीय निवासियों ने घंटों मशक्कत कर वाहन को बाहर निकाला, तब जाकर यातायात बहाल हो सका।शहर के दक्ष नागरिक ने मनपा प्रशासन से पूछ रहे है कि जब पालिका हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, तो फिर भिवंडी की सड़कें और गटर आखिर क्यों आज भी खस्ताहाल हैं।


