श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई में म्हाडा (महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की जाचक शर्तों और वर्षों से लंबित पुनर्विकास मुद्दों के चलते बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। शहर की 388 पुनर्रचित इमारतों और जुहू इलाके में मिलिटरी रडार के दायरे में आने वाली करीब 200 इमारतों के निवासियों ने आगामी महानगरपालिका चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इससे सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।


27 हजार निवासी मतदान न करने के मूड मेंमुंबई की 388 पुनर्रचित इमारतों में रहने वाले करीब 27 हजार निवासियों ने मतदान बहिष्कार की चेतावनी दी है। इनका कहना है कि पुनर्विकास के लिए म्हाडा द्वारा विकासकों पर लगाए गए 20 प्रतिशत अधिमूल्य (प्रीमियम) और मरम्मत खर्च की अनिवार्यता के कारण कोई भी डेवलपर आगे नहीं आ रहा।इन 388 इमारतों में से अब तक केवल 8 इमारतों के पुनर्विकास प्रस्ताव ही म्हाडा के पास जमा हुए हैं, जिससे समस्या की गंभीरता साफ झलकती है।
33(24) नियम के बावजूद अड़चनसरकार ने म्हाडा की पुनर्रचित इमारतों के लिए विकास नियंत्रण नियमावली में नया खंड 33(24) जोड़ा है, जिसमें 33(7) के सभी लाभ शामिल किए गए हैं। इसके बावजूद विकासक को 20 प्रतिशत अधिमूल्य और मरम्मत खर्च म्हाडा को जमा करना अनिवार्य है। निवासियों का कहना है कि यही शर्त पुनर्विकास में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।
■ जुहू में 35 हजार लोग भी मतदान से दूर
जुहू क्षेत्र में मिलिटरी रडार के अंतर्गत आने वाली लगभग 200 इमारतों के करीब 35 हजार निवासियों ने भी मतदान न करने का निर्णय लिया है। इन इमारतों पर ऊंचाई और निर्माण संबंधी प्रतिबंध हैं, जिसके कारण रुईया पार्क और कराची सोसायटी सहित कई परिसरों का पुनर्विकास पिछले 35 वर्षों से अटका हुआ है।
निवासियों ने कई बार केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय के सामने अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान नेताओं ने आश्वासन दिए, पर चुनाव के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी नाराज़गी के चलते अब बैनर लगाकर मतदान बहिष्कार की घोषणा की गई है।
■ निवासियों की प्रमुख मांगें
निवासियों ने सरकार और म्हाडा के सामने ये प्रमुख मांगें रखी हैं—म्हाडा द्वारा लगाया गया 20 प्रतिशत अधिमूल्य रद्द किया जाए।मरम्मत खर्च की मांग विकासक से न की जाए।एकल और उपकर प्राप्त इमारतों की जांच कर सामूहिक पुनर्विकास अनिवार्य किया जाए।विकासक की नियुक्ति स्वयं म्हाडा करे।
पुनर्विकास प्रस्ताव मंजूर होने तक देखभाल खर्च म्हाडा वहन करे।वारिस दर्ज करते समय सक्सेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य न किया जाए, केवल वारिसों का शपथपत्र स्वीकार किया जाए।निवासियों के इस कड़े रुख से चुनावी माहौल गर्मा गया है और प्रशासन पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ता जा रहा है।


