मुंबई वार्ता संवाददाता

महानगरपालिका चुनाव में सत्ताधारी महायुति ने पुलिस, प्रशासन और चुनाव आयोग के दबाव में साम, दाम, दंड, भेद की नीति का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बिना डगमगाए, पूरी दृढ़ता के साथ चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में हुए इस चुनाव में मुंबई में कांग्रेस को मिली सफलता भले ही बड़ी न हो, लेकिन यह निश्चित रूप से संतोषजनक है। आने वाले समय में पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा, ऐसा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं मुंबई कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा।


राजीव गांधी भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोलते हुए सचिन सावंत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विरोधी दलों को खत्म करने का काम कर रही है। विरोधी दलों के उम्मीदवारों को तोड़ना, पार्टियों में फूट डालना, विपक्ष को किसी प्रकार की मदद या वित्तीय संसाधन न मिलने देना—इस तरह के सभी हथकंडे सत्ताधारी भाजपा द्वारा अपनाए गए। ऐसे अनैतिक माहौल में भी कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता डटे रहे और पूरी मजबूती से मुकाबला किया।
कांग्रेस ने 152 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमें से 24 उम्मीदवार विजयी हुए हैं। महानगरपालिका चुनाव के इस परिणाम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। यह जीत ऊर्जा देने वाली है। हम फिर नई ताकत और जिद के साथ लड़ेंगे, जहां कमी रह गई उसका आत्ममंथन करेंगे और परिणामों का विश्लेषण करेंगे। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।


सचिन सावंत ने कहा कि भाजपा ने ‘ऑपरेशन कमल’ के जरिए विरोधी दलों को तोड़ा, लेकिन अब इसी ऑपरेशन कमल का डर भाजपा के सहयोगी दलों को भी सताने लगा है। इसी डर के कारण एकनाथ शिंदे को अपनी पार्टी के विजयी नगरसेवकों को छिपाकर रखना पड़ रहा है।
एक सवाल के जवाब में सचिन सावंत ने कहा कि वंचित बहुजन आघाड़ी को लेकर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। उन्हें उनकी मांग के अनुसार सीटें दी गईं, लेकिन उन्हें उम्मीदवार नहीं मिल सके। कुछ सीटों पर मैत्रीपूर्ण मुकाबला करना पड़ा। यदि दोनों पक्षों की ओर से बेहतर नियोजन हुआ होता तो परिणाम और भी अच्छे हो सकते थे, ऐसा उन्होंने कहा।


