नई दिल्ली/मुंबई वार्ता

चीन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं को लेकर वैश्विक टेक जगत में नई बहस छिड़ गई है। गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हासाबिस का कहना है कि चीन के एआई मॉडल अमेरिका और पश्चिमी देशों से महज कुछ महीनों पीछे हैं। उनके मुताबिक मौजूदा रफ्तार को देखते हुए चीन बहुत जल्द एआई तकनीक में पश्चिमी दुनिया की बराबरी कर सकता है, यह आकलन उन धारणाओं से अलग है, जिनमें चीन को अभी काफी पीछे माना जाता रहा है।


एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान हासाबिस ने स्पष्ट किया कि चीन के एआई मॉडल अब उन क्षमताओं के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, जिनकी कल्पना पश्चिमी दुनिया ने एक–दो साल पहले भी नहीं की थी। उन्होंने कहा, ‘संभव है कि इस समय वे केवल कुछ महीनों पीछे हों। इसका अर्थ यह है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के एआई मॉडल्स की क्षमताएं जल्द ही चीन के मॉडलों में भी देखने को मिलेंगी।’हासाबिस की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पहले ही टेस्ला प्रमुख एलन मस्क अमेरिका को एआई और रोबोटिक्स के क्षेत्र में सतर्क रहने की चेतावनी दे चुके हैं।
मस्क भी मानते हैं कि चीन इस तकनीकी दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है।गौरतलब है कि लगभग एक वर्ष पहले चीन की एआई लैब डीपसीक ने ऐसा मॉडल पेश किया था, जिसने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी थी। कम उन्नत चिप्स और अपेक्षाकृत कम लागत के बावजूद इस मॉडल का प्रदर्शन चौंकाने वाला रहा। इसके अलावा बायडू, टेनसेंट, अलीबाबा जैसी दिग्गज चीनी टेक कंपनियां, साथ ही मूनशॉट एआई और जिपू जैसे स्टार्टअप्स भी अत्याधुनिक एआई मॉडल विकसित कर रहे हैं।
इन घटनाक्रमों ने संकेत दे दिए हैं कि एआई की वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां चीन की मौजूदगी को नजरअंदाज करना पश्चिमी देशों के लिए आसान नहीं रहा।


