नई दिल्ली/मुंबई वार्ता

कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य गिडुगु रुद्र राजू ने सोमवार को आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में किए गए बदलाव और उसके स्थान पर लाए गए ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम–2025 (वीबी-जी राम-जी)’ से देशभर के 13 करोड़ से अधिक श्रमिकों के समक्ष गंभीर रोजगार संकट खड़ा हो जाएगा।


उत्तर आंध्र प्रदेश के दौरे पर निकले रुद्र राजू ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस आगामी बजट सत्र में इस नए अधिनियम का संसद के भीतर और बाहर कड़ा विरोध करेगी।
उन्होंने इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान बताते हुए कहा कि यह उन करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के साथ अन्याय है, जिनकी आजीविका मनरेगा पर निर्भर रही है।उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर इस मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन और क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
रुद्र राजू ने कहा कि मनरेगा ने पिछले दो दशकों से काम का अधिकार और मजदूरी का अधिकार सुनिश्चित किया है। इस योजना ने पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त किया, ग्रामीण विकास को गति दी और शहरों की ओर होने वाले पलायन पर अंकुश लगाया। किंतु नए अधिनियम में राज्यों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में कोई भी राज्य इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम नहीं होगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए कानून में दी गई छूट से ठेकेदारों को लाभ होगा, क्योंकि वे श्रम के स्थान पर मशीनों का उपयोग करेंगे। इसका सबसे अधिक नुकसान पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों को होगा, जिन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर नहीं मिल पाएंगे।कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस अधिनियम को वापस लेने की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखेगी और ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएगी।


