मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका ने शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए अगले तीन वर्षों में 1 लाख 34 हजार 740 कुत्तों की नसबंदी करने की योजना बनाई है। इस अभियान के लिए करीब 23 लाख 30 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे और इसके लिए नौ सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।


महापालिका के अनुसार, साल 2017 से अगस्त 2025 के बीच 1 लाख 53 हजार 622 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। वहीं 1994 से अब तक कुल 4 लाख 34 हजार 529 आवारा कुत्तों का नसबंदी ऑपरेशन किया गया है। यह अभियान 1994 से चल रहा है और 1998 से हाईकोर्ट के निर्देशानुसार इसमें गैर-सरकारी संस्थाओं की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
इस उपक्रम में “वेल्फेयर ऑफ स्ट्रे डॉग्स”, “बॉम्बे सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स”, “इन डिफेंस ऑफ एनिमल्स”, “अहिंसा” और “यूथ ऑर्गनाइजेशन इन डिफेंस ऑफ एनिमल” जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
शहर में कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे इस योजना को तेजी से लागू करने की जरूरत बताई जा रही है। हालांकि, प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कुछ नगरसेवकों ने सवाल भी उठाए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) की पार्षद राखी जाधव ने प्रस्ताव में पर्याप्त जानकारी न होने का मुद्दा उठाते हुए विशेष बैठक की मांग की। वहीं कांग्रेस की ट्यूलिप मिरांडा ने सुझाव दिया कि अस्पताल परिसर से पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी के बाद वहीं वापस न छोड़ा जाए, बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाए।
मुंबई में आवारा कुत्तों को लेकर जनवरी 2024 में किए गए सर्वेक्षण को लेकर स्थायी समिति सदस्य तेजिंदर तिवाना ने अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि यह सर्वे शहर की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
तिवाना ने बताया कि उन्होंने इस सर्वे रिपोर्ट को स्थायी समिति के समक्ष पेश करने की मांग की थी, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई।
उन्होंने कहा, “इस रिपोर्ट का अब गहन अध्ययन किया जाएगा, ताकि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी उपाय लागू किए जा सकें।”
तिवाना के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में ऐसी योजनाएं बनाई जाएंगी, जो शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद करेंगी और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी।
एमआईएम के पार्षद जमीर कुरैशी ने हर बार उन्हीं संस्थाओं को ठेका देने पर सवाल उठाया। इस पर अतिरिक्त आयुक्त अश्विनी जोशी ने कहा कि नसबंदी करने वाली संस्थाएं सीमित हैं, इसलिए उन्हीं को काम दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने हेतु सरकार से जमीन की मांग की गई है।
2024 के सर्वे के मुताबिक मुंबई में 90,757 कुत्ते हैं, जिनमें से 33,671 कुत्तों की नसबंदी नहीं हुई है। इनमें 11,224 मादा कुत्ते शामिल हैं। अगर इनकी नसबंदी नहीं की गई, तो अगले 10 वर्षों (2024-2033) में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़कर 4 लाख 48 हजार 947 तक पहुंच सकती है।
इस स्थिति को देखते हुए महानगरपालिका ने इस बड़े अभियान को जल्द और प्रभावी तरीके से लागू करने का फैसला किया है।


