मुंबई वार्ता संवाददाता

Bombay High Court ने हाल ही में Western Railway को बांद्रा (पूर्व) के गरीब नगर इलाके में अवैध और अनधिकृत ढांचों के खिलाफ जारी तोड़फोड़ अभियान को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्ष 2021 के सर्वेक्षण में पात्र घोषित किए गए झुग्गीवासियों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की जानी चाहिए।


न्यायमूर्ति Ajey S Gadkari और Kamal R Khata की खंडपीठ ने 29 अप्रैल को यह आदेश गरीब नगर रहिवासी वेलफेयर संघ सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि 18 मार्च को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश—जिसमें कुछ संरचनाओं को न गिराने का निर्देश था—के बावजूद रेलवे ने कई ऐसे ढांचे तोड़ दिए, जो प्रोजेक्ट प्रभावित व्यक्तियों (PAPs) के रूप में पात्र घोषित किए गए थे।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि प्रशासन मौके पर फेंसिंग कर रहा है और वहां मौजूद सामान हटाया जा रहा है, जो न केवल मनमाना और अवैध है बल्कि कोर्ट की कार्यवाही की अवमानना भी है। अधिवक्ता राजेश खोबरागड़े के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया कि इन कार्रवाइयों से पात्र परिवारों को भारी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान हुआ है और उनके मौलिक अधिकारों—अनुच्छेद 14, 19 और 21—का उल्लंघन हुआ है।
याचिका में यह मांग की गई थी कि Mumbai Railway Vikas Corporation Limited, Mumbai Metropolitan Region Development Authority और वेस्टर्न रेलवे द्वारा संयुक्त रूप से किए गए सर्वे में पात्र ठहराए गए ढांचों को संरक्षण दिया जाए।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि रेलवे अवैध ढांचों के खिलाफ कार्रवाई जारी रख सकता है, लेकिन 10 और 11 अगस्त 2021 के सर्वे में पात्र पाए गए झुग्गीवासियों के हितों की उचित सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।


