मुंबई वार्ता संवाददाता

विधान परिषद चुनाव की घोषणा होते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी में उम्मीदवार चयन को लेकर चल रही खींचतान की हो रही है, जबकि कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार तय करने के लिए 22 मई को मुंबई में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह बैठक प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ की अध्यक्षता में होगी, जिसमें जिले के सभी वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया गया है।


राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो भाजपा इस चुनाव में सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। पार्टी के पास अकेले करीब 150 मतदाता हैं। वहीं कांग्रेस के पास 120 मतदाता हैं। महायुति में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 33, युवा स्वाभिमान के 26, प्रहार जनशक्ति पार्टी के 21, शिवसेना के 18 और बहुजन समाज पार्टी के 3 मतदाताओं को मिलाकर महायुति का कुल आंकड़ा 251 तक पहुंच रहा है।
दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस के साथ शिवसेना के 21 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 11 सदस्य हैं। इस तरह महाविकास आघाड़ी की कुल ताकत 152 तक पहुंचती है। दोनों गठबंधनों के बीच लगभग 100 मतों का बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
भाजपा में पूर्व पालकमंत्री प्रवीण पोटे का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। उन्होंने इससे पहले भी दो बार इस मतदारसंघ का प्रतिनिधित्व किया है। हाल ही में भाजपा शहराध्यक्ष डॉ. नितीन धांडे का नाम भी तेजी से चर्चा में आया है। महायुति के सहयोगी दल युवा स्वाभिमान का उन्हें खुला समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा भी कुछ अन्य नामों पर चर्चा जारी है और आने वाले दिनों में भाजपा उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
कांग्रेस में अभी तक किसी भी संभावित उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है।
हालांकि पार्टी ऐसे उम्मीदवार की तलाश में जुटी है, जिसके संगठन और आर्थिक स्तर पर मजबूत संबंध हों। इसी मुद्दे पर 22 मई को मुंबई में होने वाली बैठक में शहराध्यक्ष बबलू शेखावत, ग्रामीण अध्यक्ष बबलू देशमुख सहित जिले के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।
यह मतदारसंघ पिछले चार चुनावों से भाजपा के कब्जे में है। पिछली दो बार प्रवीण पोटे ने जीत दर्ज की थी, जबकि उससे पहले भाजपा के तत्कालीन नेता जगदीश गुप्ता ने लगातार दो चुनाव जीते थे। कांग्रेस हर बार मुख्य प्रतिद्वंद्वी रही, लेकिन पर्याप्त मतदाता संख्या होने के बावजूद वह इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी।


