मुंबई वार्ता संवाददाता

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडेय और अन्य आरोपियों के खिलाफ ठाणे में दर्ज उगाही (एक्सटॉर्शन) की एफआईआर को रद्द कर दिया। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की खंडपीठ का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं हुआ है।


यह एफआईआर बिल्डर और कारोबारी संजय पुनमिया की शिकायत पर 26 अगस्त 2024 को दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2021 में संजय पांडे ने डीजीपी पद का दुरुपयोग करते हुए उनसे पैसे वसूलने का प्रयास किया।
पुनमिया ने दावा किया था कि संजय पांडे और अन्य लोगों ने पुराने मामलों को दोबारा खोलने तथा फर्जी एफआईआर दर्ज कराने की धमकी देकर उनसे झूठे बयान दिलाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों ने, कथित तौर पर संजय पांडे के निर्देश पर, उन्हें तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कथित अर्बन लैंड सीलिंग (यूएलसी) घोटाले में फंसाने के लिए दबाव बनाया।
शिकायत के अनुसार, संजय पांडे ने एक करोड़ रुपये की मांग की थी। पुनमिया ने आरोप लगाया कि उनके छोटे भाई को भी धमकाया गया और फर्जी मामलों से बचाने के नाम पर उनसे 35 लाख रुपये वसूले गए।
एफआईआर में संजय पांडे के अलावा अधिवक्ता शेखर जगताप और अग्रवाल परिवार के कुछ सदस्यों के नाम भी शामिल थे।
दूसरी ओर, संजय पांडे ने अपने वकील राहुल कामेरकर के माध्यम से सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। हाईकोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने कहा कि यह मामला उनके रिटायरमेंट के बाद राजनीतिक बदले की भावना से दर्ज कराया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि कथित घटनाएं 2021 की थीं, जबकि शिकायत 2024 में दर्ज कराई गई, जो तीन साल की असामान्य देरी को दर्शाता है।


