मुंबई में ‘शून्य जनहानि’ लक्ष्य के साथ काम करें, सभी एजेंसियां समन्वय बनाए रखें : उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

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मुंबई वार्ता संवाददाता

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने निर्देश दिए हैं कि मानसून के दौरान मुंबई और महानगर क्षेत्र में ‘शून्य जनहानि’ को लक्ष्य बनाकर सभी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बारिश में देरी होने के कारण आपदा प्रबंधन के साथ-साथ पेयजल की उपलब्धता की योजना पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने नालों की सफाई, होल्डिंग पोंड, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा जाल लगाने तथा होर्डिंग्स का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए। साथ ही, एनडीआरएफ की तर्ज पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका का अपना आपदा प्रतिक्रिया दल गठित करने की आवश्यकता भी जताई।


उपमुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुंबई क्षेत्र में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान महापौर ऋतु तावड़े, उपमहापौर संजय घाडी, महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में मध्य और पश्चिम रेलवे, भारतीय मौसम विभाग, तटरक्षक बल, नौसेना, एनडीआरएफ, मुंबई पुलिस, म्हाडा, एमएमआरडीए और बेस्ट के अधिकारी भी शामिल हुए।


एकनाथ शिंदे ने कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका और अन्य विभागों की तैयारियां मुंबईकरों को राहत देने में सहायक साबित होंगी। जिन क्षेत्रों में नालों की सफाई का कार्य शेष है, उसे तत्काल पूरा किया जाए। बारिश में देरी के कारण प्रशासन को अतिरिक्त तैयारी का समय मिला है, जिसका उपयोग प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए। उन्होंने फ्लड गेट और होल्डिंग पोंड को पूरी तरह सक्रिय रखने, बेस्ट और एसटी द्वारा वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था तैयार रखने तथा पेड़ गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।


उन्होंने रेलवे से पटरियों के नीचे स्थित नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा और झुग्गी बस्तियों में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था से जलजनित रोगों के प्रसार को रोकने पर जोर दिया। इसके अलावा ‘हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे आपला दवाखाना’ में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार रखने और मेट्रो स्टेशनों पर जलभराव रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने के निर्देश भी दिए।


बैठक में महानगरपालिका ने जानकारी दी कि मुंबई में 125 वर्षामापक यंत्र स्थापित हैं तथा जून से सितंबर के बीच साढ़े चार मीटर से अधिक ऊंची ज्वार के 24 दिन रहेंगे। जलभराव से निपटने के लिए 934 स्थानों पर पंप लगाए गए हैं और 65 मिनी पंपिंग स्टेशन कार्यरत हैं। इनके संचालन की निगरानी के लिए इस वर्ष स्मार्ट पंप प्रबंधन प्रणाली शुरू की गई है, जिसका नियंत्रण महानगरपालिका के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से किया जाएगा।


महानगरपालिका ने यह भी बताया कि मुंबई में 1,000 ‘आपदा मित्र’, एनडीआरएफ की तीन टीमें और नौसेना की नौ टीमें तैनात रखी गई हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि एनडीआरएफ, नौसेना, वायुसेना और सेना का सहयोग हर बार महत्वपूर्ण साबित होता है और सभी एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर आपदा के समय मुंबईकरों को राहत पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।


उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मुंबई के 2,000 किलोमीटर सड़क नेटवर्क में से 1,700 किलोमीटर सड़कों का कंक्रीटीकरण पूरा हो चुका है, जिससे सड़क मरम्मत और गड्ढे भरने पर होने वाला खर्च लगभग 80 प्रतिशत तक कम हुआ है।

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