सुरेश मिश्र/कवि/मुंबई वार्ता

मुंबई में चारों तरफ पानी ही पानी। सड़कें तालाब बन गई हैं। लोकल बंद, बसें बंद। टैक्सी, रिक्शा वाले मनमानी फायदा उठा रहे हैं। चाल में रहने वाली नायिका परेशान है। घरों में पानी घुस गया है,पतरा चू रहा है। प्रियतम दो दिन पहले ड्यूटी पर गए थे,अभी तक लौटकर नहीं आए हैं। उसने अपनी सखी को फोन किया –
सगरी मुंबई में बरसे ला बदरिया सखी*हमके लागे डरिया सखी न।
सगरे सब-वे, हिंदमाता,सबके बचावइं विधाता,
जाने केकरी लागि गइल बा नजरिया सखी हमके लागे डरिया सखी न।
का बताई हम कहानी,चारिउ ओरी पानी-पानी,
कुर्ला अउ कमानी बनि गइल गटरिया सखी
हमके लागे डरिया सखी न।
सड़क बनि गइल बा ताल,आम मनई बा बेहाल,
मउज करत हउवें,सगरे भ्रष्टाचरिया सखी
हमके लागे डरिया सखी न।
गजब बीएमसी क झोल,गटर भरल, खुलल होल,
जियरा कहइ देई, लाख-लाख गरिया सखी
हमके लागे डरिया सखी न।
मीरा-भाईंदर क हाल,रुकि गइल बा सब क चाल,
नल मा पानी नाहीं,रोड बनल दरिया सखी
हमके लागे डरिया सखी न।
बलम नौकरी पे गइले,आजु तलक नाहीं अइले,
रोई रात-दिना, कहां हौं संवरिया सखी
हमके लागे डरिया सखी न।




