नियम तोड़ने वाले चैरिटी अस्पतालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, जिला स्तर पर चलेगा विशेष निरीक्षण अभियान: महाराष्ट्र सरकार।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के चैरिटी अस्पतालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, प्रत्येक जिले में विशेष निरीक्षण अभियान चलाकर अस्पतालों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, मुफ्त इलाज की व्यवस्था और अन्य अनिवार्य नियमों की गहन जांच की जाएगी।


विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान सदस्य अनिल परब के सवाल का जवाब देते हुए शहरी विकास विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे मंत्री शंभूराज देसाई ने यह जानकारी दी। इस दौरान नीलम गोरहे, परिणय फुके, चंद्रकांत रघुवंशी, राजीव पोतदार, चित्रा वाघ, बच्चू कडू, निरंजन डावखरे, भाई जगताप, प्रमोद जठार और मनीषा कायंदे ने भी पूरक प्रश्न पूछे।
मंत्री देसाई ने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिले में चैरिटी अस्पतालों

की निगरानी के लिए जिला स्तरीय समितियां पहले से कार्यरत हैं। इन समितियों को नियमित बैठकें आयोजित कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे कि अस्पताल सभी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। अतिरिक्त जिला कलेक्टर, जो इन समितियों के सदस्य-सचिव हैं, उन्हें तत्काल विशेष निरीक्षण अभियान शुरू करने के निर्देश दिए जाएंगे। जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


उन्होंने कहा कि सरकार अस्पतालों द्वारा मरीजों से वसूली जा रही अत्यधिक फीस की शिकायतों पर भी कड़ी नजर रख रही है। ऐसे मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजकों (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति पर भी सरकार विचार कर रही है।


मंत्री ने बताया कि सभी पात्र चैरिटी अस्पतालों के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अनिवार्य है। साथ ही अस्पतालों को मुफ्त उपचार संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने वाला डैशबोर्ड लगाना भी कानूनी रूप से जरूरी है। नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों को कड़ी चेतावनी दी गई है और नियुक्त ‘आरोग्य दूत’ जमीनी स्तर पर इसकी जांच करेंगे।


इस दौरान शहरी विकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने ग्लोबल हॉस्पिटल से जुड़े मामले पर कहा कि यह प्रकरण फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। अस्पताल के नर्सिंग पंजीकरण और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) रद्द करने के लिए पहले नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अदालत ने फिलहाल उस पर स्थगन आदेश दिया है। अदालत के अंतिम निर्णय के बाद अस्पताल को दिए गए अतिरिक्त एफएसआई (Floor Space Index) को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
वहीं, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) मंत्री नरहरी झिरवाल ने विधान परिषद में घोषणा की कि हाफकिन बायो-फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ट्रिपल वैक्सीन (DPT) उत्पादन प्रयोगशाला के आधुनिकीकरण के लिए राज्य सरकार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराएगी।


विधान परिषद सदस्य भाई जगताप द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में मंत्री झिरवाल ने बताया कि हाफकिन के समग्र विकास के लिए पहले मांगे गए 1,100 करोड़ रुपये में से 35 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जबकि अतिरिक्त 30 करोड़ रुपये की मांग भेजी गई है और धनराशि जारी करने की प्रक्रिया चल रही है।


उन्होंने कहा कि हाफकिन देश और दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था है। कर्मचारियों की कमी, वेतन, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में जल्द ही बैठक आयोजित कर लंबित मुद्दों पर निर्णय लिया जाएगा।


मंत्री ने कहा कि पोलियो, डिप्थीरिया सहित अन्य आवश्यक टीकों के उत्पादन को बढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है और राज्य सरकार हाफकिन कॉर्पोरेशन को आधुनिक एवं अधिक सक्षम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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