मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

मुंबई में अवैध फेरीवालों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की सख्त कार्रवाई के बीच अधिकृत फेरीवाले भी प्रभावित हो रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए उपमहापौर संजय घाड़ी ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर मांग की है कि क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र रखने वाले अधिकृत फेरीवालों के खिलाफ महानगरपालिका और पुलिस किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करे।


उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार मुंबई में पंजीकृत फेरीवालों को 1 जून से क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र वितरित किए जा रहे हैं। अब तक हजारों फेरीवालों को यह पहचान पत्र दिया जा चुका है। अवैध फेरीवालों पर रोक लगाने और अधिकृत फेरीवालों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई थी।


हालांकि, क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र मिलने के बावजूद कई अधिकृत फेरीवालों पर महानगरपालिका और पुलिस की कार्रवाई जारी है। इसे लेकर उपमहापौर संजय घाड़ी ने नाराजगी जताते हुए आयुक्त को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि क्यूआर कोड धारक फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि शहर में जल्द से जल्द पथविक्रेता समिति का गठन किया जाए तथा फेरीवाला और नो-फेरीवाला जोन का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, ताकि फेरीवालों की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। साथ ही संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
घाड़ी ने बताया कि वर्ष 2014 में मुंबई के 99,435 फेरीवालों ने
महानगरपालिका के पास पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। इनमें से 50,966 फेरीवालों को क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिन फेरीवालों के पास यह पहचान पत्र है, वे अधिकृत हैं और उन्हें अपना व्यवसाय करने की अनुमति मिलनी चाहिए। इसके बावजूद उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है और उन्हें कारोबार करने से रोका जा रहा है, जो अनुचित है।


