मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता मेहबूब शेख ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने राज्य आबकारी विभाग के अधीन द्वितीय निरीक्षक पद के लिए आयोजित परीक्षा के कथित अंकन पैटर्न लीक होने का मुद्दा उठाते हुए आयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।


मेहबूब शेख ने दावा किया कि राज्य आबकारी विभाग के द्वितीय निरीक्षक पद की परीक्षा का अंकन पैटर्न लीक होकर व्हॉट्सऐप पर प्रसारित हुआ था। उनके अनुसार, इस परीक्षा में करीब 900 विद्यार्थी शामिल हुए थे और इस संबंध में एमपीएससी के समक्ष शिकायत भी की गई है।
उन्होंने कहा कि एमपीएससी द्वारा अंकन पैटर्न लीक होने की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है तथा नवी मुंबई पुलिस द्वारा इस संबंध में रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने की खबर है। शेख ने सवाल किया कि यदि पैटर्न लीक हुआ था तो इसे लीक करने वालों के खिलाफ अब तक मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया।
उन्होंने एक अभ्यर्थी के परीक्षा परिणाम का हवाला देते हुए भी सवाल उठाए। शेख के मुताबिक, एक छात्रा को पहले प्रश्नपत्र में 81 और दूसरे प्रश्नपत्र में 45 अंक मिले हैं। उन्होंने इन अंकों को अन्य अभ्यर्थियों के परिणामों की तुलना में संदिग्ध बताया। हालांकि, इन अंकों के पीछे के कारणों को लेकर किसी आधिकारिक जांच या निष्कर्ष की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
मेहबूब शेख ने एमपीएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर व्हॉट्सऐप समूहों में हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि एक विद्यार्थी सार्वजनिक रूप से यह कह रहा है कि ‘अमित सर की वजह से मैं पीएसआई बना।’ शेख ने यह भी आरोप लगाया कि मैदानी परीक्षा के दौरान कुछ विद्यार्थियों को तीन बार मौका दिया गया। उन्होंने कहा, “सेटिंग लगाकर गए विद्यार्थी आज नौकरी कर रहे हैं।” हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पत्रकारों के मनोज जरांगे के आंदोलन और उनके उपोषण से जुड़े सवाल पर शेख ने कहा कि सरकार पहले भी नौ-दस बार उपोषण खत्म करा चुकी है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो। शेख ने आरोप लगाया कि उपोषण खत्म कराते समय सरकार एक बात कहती है और बाद में अलग रुख अपनाती है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कब तक दो समुदायों को आमने-सामने लाया जाएगा।
शेख ने ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क और जीएसटी लगाए जाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले लोगों को ऑनलाइन भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और बाद में उसी भुगतान पर शुल्क और जीएसटी लगाया जाता है। उन्होंने इसे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए सरकार की आलोचना की।


