मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुख्यालय जांच इकाई (Headquarter Investigation Unit) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 की धारा 37A के तहत कार्रवाई करते हुए मेसर्स रिलायंस पावर लिमिटेड (RPL) की ₹2,032.81 करोड़ मूल्य की भारत स्थित संपत्तियों को जब्त कर लिया है। जब्त की गई संपत्तियों में RPL के बैंक बैलेंस और मेसर्स सासन पावर लिमिटेड (M/s Sasan Power Limited) में उसकी शेयरहोल्डिंग (शेयरधारिता) शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, ये संपत्तियां भारत के बाहर फेमा की धारा 4 का उल्लंघन कर रखी गई विदेशी मुद्रा के मूल्य के बराबर हैं।


■ जांच की शुरुआत और सेबी (SEBI) की रिपोर्ट
ईडी ने यह जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मिली उस जानकारी के आधार पर शुरू की थी, जो RPL द्वारा अपने खातों में कुल ₹2,101.46 करोड़ की राशियां बट्टे खाते (write-offs/provisions) में डालने से संबंधित थी। ये राइट-ऑफ ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और अग्रिम भुगतानों (advances) से जुड़े हुए थे।
इसके बाद ईडी ने 06.03.2026 से 08.03.2026 के दौरान फेमा के तहत तलाशी अभियान (search operations) चलाए, जिसमें कई आपत्तिजनक सबूत जब्त किए गए और कई व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए।
फंड के गबन और राउंड ट्रिपिंग की परतें
■ ईडी की जांच में निम्नलिखित प्रमुख बातें सामने आई हैं:
विदेश में फंड जुटाना: रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (RNRL – जिसका अब RPL में विलय हो चुका है) ने साल 2006 में फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCB) के जरिए 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए थे।
सिंगापुर सहायक कंपनी में निवेश: इस राशि में से 275 मिलियन अमेरिकी डॉलर सिंगापुर स्थित उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) पीटीई लिमिटेड’ (RNRL-S) में निवेश किए गए।
बैंक डिपॉजिट और विदेशी कंपनियों को लोन: RNRL-S ने इन पैसों को जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (Deutsche Bank Suisse SA) में जमा (deposit) किया। इस डिपॉजिट को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में पंजीकृत संस्थाओं (entities) को दिए गए लोन के लिए गारंटी/कोलेटरल (collateral) के रूप में इस्तेमाल किया गया।
■ कंट्रोल और राउंड ट्रिपिंग: जांच में पाया गया कि इन BVI संस्थाओं को भारत से रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) द्वारा कुछ मुखौटा व्यक्तियों (front persons) के जरिए नियंत्रित और प्रबंधित किया जा रहा था, जो समूह के निर्देशों पर काम करते थे।
■ रकम का दुरुपयोग: लोन की रकम का इस्तेमाल मॉरीशस स्थित विदेशी संस्थाओं के माध्यम से भारत में फंड की अस्थायी ‘राउंड-ट्रिपिंग’ (roundtripping) सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया। इन पैसों का इस्तेमाल रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के फायदे के लिए किया गया और इन्हें भारत से बाहर रखा गया।
■ लोन न चुकाना और फर्जी दस्तावेजों का सहारा
BVI संस्थाएं डॉयचे बैंक से लिए गए लोन को चुकाने में विफल रहीं। इस मामले को छिपाने (cover up) के लिए फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए गए, ताकि यह दिखाया जा सके कि RNRL-S और RPL की इंडोनेशियाई सहायक कंपनियों ने इन BVI संस्थाओं को वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए अग्रिम (advances) दिए थे। जांच में सामने आया कि ये दस्तावेज़ बैकडेटेड (पुरानी तारीखों में) तैयार किए गए थे ताकि इन लेन-देन को वैध व्यापारिक लेन-देन के रूप में दर्शाया जा सके।
ईडी ने प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है।


