मुंबई में रक्त की किल्लत? केईएम अस्पताल में गंभीर मरीजों को रक्त और पीआरबीसी के लिए करना पड़ रहा इंतजार।

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■ बी पॉजिटिव रक्त समूह की छह यूनिट लाल रक्त कोशिकाओं के लिए तीन दिन से तलाश, ए पॉजिटिव रक्त की व्यवस्था चौथे दिन हुई; रक्त की उपलब्धता पर उठे सवाल।

मुंबई वार्ता संवाददाता

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक रक्त और रक्तघटकों की समय पर उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। परेल स्थित किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल में दो मरीजों के लिए रक्त जुटाने में उनके परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इन मामलों के सामने आने के बाद शहर में रक्त की कमी और जरूरत के समय रक्तघटक उपलब्ध होने की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इन दो घटनाओं के आधार पर पूरे मुंबई में रक्त की व्यापक कमी होने की पुष्टि नहीं होती है।

तीन दिन से छह यूनिट बी पॉजिटिव रक्त की तलाशरिपोर्ट के अनुसार, केईएम अस्पताल में उपचार करा रही एक महिला मरीज को बी पॉजिटिव समूह की लाल रक्त कोशिकाओं (पीआरबीसी) की छह यूनिट की आवश्यकता थी। मरीज के पति के मुताबिक, आवश्यक रक्तघटक जुटाने के लिए परिवार पिछले तीन दिनों से अलग-अलग जगहों पर संपर्क कर रहा था। इसके बावजूद उन्हें जरूरी रक्तघटक उपलब्ध नहीं हो पाए थे।गंभीर स्थिति में उपचार करा रहे मरीज के लिए रक्तघटक समय पर नहीं मिलना परिवार के लिए चिंता का विषय बन गया। इस घटना ने जरूरतमंद मरीजों के परिजनों को रक्त की व्यवस्था करने में होने वाली परेशानियों को उजागर किया है।

■ ए पॉजिटिव रक्त के लिए भी तीन दिन तक मशक्कत

दूसरे मामले में गंभीर बीमारी से पीड़ित एक बुजुर्ग मरीज की शल्य चिकित्सा के लिए ए पॉजिटिव समूह के रक्त की दो यूनिट की जरूरत थी। मरीज के बेटे के अनुसार, रक्त की व्यवस्था करने के लिए परिवार लगातार तीन दिनों तक प्रयास करता रहा।आखिरकार चौथे दिन रक्त की व्यवस्था हो सकी। इसमें एक यूनिट रक्त अस्पताल की रक्तपेढ़ी से मिला, जबकि दूसरी यूनिट मरीज के बेटे ने अपने प्रयासों से जुटाई। इसके बाद बुजुर्ग मरीज की शल्य चिकित्सा की गई।दोनों घटनाओं से यह सवाल सामने आया है कि गंभीर मरीजों को जरूरत के समय निर्धारित रक्त समूह और आवश्यक रक्तघटक उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

■ क्या मुंबई में वास्तव में रक्त की कमी है?

इन घटनाओं के बाद मुंबई में रक्त की कमी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, शहर में रक्त की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विभिन्न रक्तपेढ़ियों में उपलब्ध भंडार, रक्त समूह के अनुसार मांग और आपूर्ति तथा रक्तघटकों की उपलब्धता के आधिकारिक आंकड़े जरूरी हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में महाराष्ट्र राज्य रक्त संक्रमण परिषद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ये घटनाएं किसी विशेष रक्त समूह की सीमित उपलब्धता, रक्तघटकों की आपूर्ति में परेशानी या व्यापक कमी का परिणाम हैं।

■ समय पर रक्त मिलना गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक

बड़े सरकारी अस्पतालों में दुर्घटना के शिकार मरीजों, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और शल्य चिकित्सा कराने वाले मरीजों को रक्त तथा उसके विभिन्न घटकों की आवश्यकता होती है। पीआरबीसी यानी पैक्ड रेड ब्लड सेल्स का उपयोग मुख्य रूप से लाल रक्त कोशिकाओं की जरूरत वाले मरीजों के उपचार में किया जाता है।ऐसे में रक्त और रक्तघटकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। केईएम अस्पताल में सामने आए इन मामलों ने रक्त की मांग और आपूर्ति की निगरानी, रक्तपेढ़ियों के बीच बेहतर समन्वय तथा आपातकालीन जरूरतों के लिए पर्याप्त भंडार बनाए रखने की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया है।

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