सोशल मीडिया का ‘गैंगस्टर स्वैग’ युवाओं को अपराध की दुनिया में खींच रहा, लॉरेंस बिश्नोई गैंग में भर्ती का खतरनाक जाल।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी आपराधिक घटनाओं की जांच में एक चिंताजनक पहलू सामने आ रहा है। कम उम्र के युवाओं का सोशल मीडिया पर गैंगस्टरों की छवि से प्रभावित होकर अपराध की दुनिया में कदम रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इंस्टाग्राम पर गैंगस्टरों के वीडियो, हथियारों के साथ तस्वीरें, धमकियों और कथित हमलों के बाद जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट के जरिए अपराध को ताकत, शोहरत और दबदबे के रूप में पेश किया जाता है। इससे कुछ युवा इस दुनिया को आकर्षक समझने लगते हैं, जबकि इसकी वास्तविकता जेल, हिंसा और बर्बाद होते भविष्य के रूप में सामने आती है।

■ सोशल मीडिया पर लोकप्रियता का भ्रम

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बिश्नोई गैंग से जुड़े कुछ सोशल मीडिया खाते ऐसे वीडियो और तस्वीरें साझा करते हैं, जिनमें गैंग के सदस्यों को रौबदार अंदाज में दिखाया जाता है। अदालत में पेशी के दौरान की तस्वीरों और हथियारों के साथ बनाए गए वीडियो से भी गैंग की छवि को प्रचारित किया जाता है। ऐसे कई खाते खुद को प्रशंसक खाते के रूप में पेश करते हैं।इन पोस्टों को मिलने वाले लाइक और टिप्पणियों से प्रभावित होकर कुछ युवा गैंगस्टरों को ताकतवर और प्रभावशाली समझने लगते हैं।

पुलिस के अनुसार, कुछ युवक खुद भी ऐसे खातों को संदेश भेजकर गैंग के लिए काम करने का अवसर मांगते हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अपराध का महिमामंडन युवाओं को प्रभावित करने का एक अहम माध्यम बन गया है।

■ गरीबी, बेरोजगारी और बड़े पैसे का लालच

पुलिस जांच में सामने आया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले और रोजगार की तलाश में भटक रहे कुछ युवाओं को गैंग अपने जाल में फंसाने की कोशिश करता है। उन्हें पैसे, पहचान और अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनाने का लालच दिया जाता है। कुछ मामलों में विदेश, खासकर कनाडा में बेहतर जीवन मिलने का सपना भी दिखाए जाने की बात सामने आई है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में वर्ष 2024 से 2026 के बीच बिश्नोई गैंग से कथित तौर पर जुड़े जबरन वसूली के 10 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस नेटवर्क में विदेश में बैठे कथित संचालकों, स्थानीय संपर्कों और हमलों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले युवाओं की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं।

■ स्थानीय संपर्कों के जरिए भर्ती, फिर अपराध में इस्तेमाल

पुलिस के मुताबिक, गैंग से जुड़े कथित नेटवर्क में स्थानीय संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये संपर्क निशाना बनाए जाने वाले लोगों की पहचान करने और युवाओं को नेटवर्क तक पहुंचाने में मदद करते हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया से प्रभावित और अपराध की दुनिया में पहचान बनाने के इच्छुक युवाओं को पहले अपने संपर्क में लिया जाता है और फिर कथित तौर पर अलग-अलग काम सौंपे जाते हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, ऐसे युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से निशाना बनाया जाता है और उनकी पृष्ठभूमि तथा उपयोगिता का आकलन करने के बाद विभिन्न मामलों में इस्तेमाल किया जाता है। इस नेटवर्क के संचार में सिग्नल जैसे कूटबद्ध संदेश भेजने वाले माध्यम का इस्तेमाल किए जाने की बात जांच में सामने आई है।

■ गैंगस्टर बनने का सपना, लेकिन अंत जेल में

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कथित तौर पर इन गतिविधियों में शामिल कुछ युवा पहले किसी आपराधिक मामले में दर्ज नहीं होते। सोशल मीडिया पर गैंग की लोकप्रियता देखकर वे अपराध की दुनिया में प्रवेश करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बाद उनका इस्तेमाल कथित तौर पर धमकी देने, जबरन वसूली और गोलीबारी जैसी गंभीर वारदातों में किया जा सकता है।

पुलिस का मानना है कि गैंगस्टरों की छवि को महिमामंडित करने वाली सामग्री युवाओं को वास्तविक जोखिमों से दूर रखती है। उन्हें शुरुआत में पैसा, प्रसिद्धि और दबदबा दिखाई देता है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद लंबी कानूनी लड़ाई, जेल और परिवार पर पड़ने वाले असर का सामना करना पड़ता है।

बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों की जांच इस बात की ओर संकेत करती है कि संगठित अपराध से निपटने के लिए केवल गोलीबारी करने वालों को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को प्रभावित करने वाले सोशल मीडिया खातों, स्थानीय संपर्कों और कथित संचालकों के नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है। साथ ही, युवाओं को रोजगार, सही मार्गदर्शन और अपराध के वास्तविक परिणामों के प्रति जागरूक करना भी अहम है।

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