मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र की एमएचटी-सीईटी 2027 परीक्षा को लेकर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के फैसलों पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश महासचिव एडवोकेट अमोल मातेले ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि महायुति सरकार और राज्य का शिक्षा विभाग बिना उचित योजना के फैसले ले रहा है, जिससे लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों में भ्रम, चिंता और मानसिक तनाव पैदा हो रहा है।


एडवोकेट अमोल मातेले ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पहले सरकार ने एमएचटी-सीईटी 2027 की पहली परीक्षा दिसंबर महीने में कराने का निर्णय घोषित किया। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच घबराहट और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। अब सरकार ने अपने फैसले से पीछे हटते हुए दोनों प्रयास 12वीं की बोर्ड परीक्षा के बाद आयोजित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा विभाग की कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि उसके अव्यवस्थित कामकाज और लापरवाही का प्रमाण है।
मातेले ने सवाल उठाया कि जब 12वीं कक्षा का 50 से 60 प्रतिशत पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हुआ था, तब दिसंबर में एमएचटी-सीईटी का पहला प्रयास आयोजित करने का निर्णय कैसे लिया जा सकता था? क्या शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को शैक्षणिक सत्र की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं थी? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले जल्दबाजी में फैसले लागू करती है, विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी में डालती है और विरोध बढ़ने पर अपने ही फैसले वापस ले लेती है।
■ विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव, अभिभावकों पर आर्थिक बोझ
एडवोकेट मातेले ने कहा कि दिसंबर में परीक्षा होने की आशंका के कारण हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों ने महंगे क्रैश कोर्स में दाखिला लेने सहित अतिरिक्त तैयारियां शुरू कर दी थीं। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि सरकार के ऐसे फैसलों से विद्यार्थियों को हुई मानसिक परेशानी और अभिभावकों पर पड़े आर्थिक बोझ की जिम्मेदारी कौन लेगा?उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र कोई ऐसी प्रयोगशाला नहीं है, जहां सरकार बार-बार नए नियम लागू करके विद्यार्थियों के भविष्य के साथ प्रयोग करे। परीक्षा संबंधी नीतियां बनाते समय शैक्षणिक सत्र, पाठ्यक्रम की स्थिति और विद्यार्थियों की तैयारी को ध्यान में रखना आवश्यक है।
■ शिक्षा विभाग की नीतियों में स्थिरता का अभाव
मातेले ने आरोप लगाया कि एमएचटी-सीईटी, शिक्षक भर्ती और स्कूल प्रवेश प्रक्रिया जैसे मामलों में भी शिक्षा विभाग की नीतियों में स्थिरता और दूरदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े शैक्षणिक निर्णय से पहले शिक्षा विशेषज्ञों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से चर्चा की जानी चाहिए। सरकार की ओर से पर्याप्त संवाद के बिना फैसले लेने से महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
■ परीक्षा की तारीखें तत्काल घोषित करने की मांग
एडवोकेट अमोल मातेले ने कहा कि 12वीं की बोर्ड परीक्षा विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ सीईटी की तारीखों को लेकर अनिश्चितता विद्यार्थियों के पूरे शैक्षणिक वर्ष को प्रभावित करती है।उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार और सीईटी सेल दोनों प्रयासों की सटीक तारीखें तथा पारदर्शी परीक्षा कार्यक्रम तत्काल घोषित करें, ताकि विद्यार्थियों को अपनी तैयारी व्यवस्थित करने और मानसिक दबाव से राहत पाने का अवसर मिल सके।
■ आंदोलन की चेतावनी
एडवोकेट मातेले ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि अब उन्हें अपने कामकाज में सुधार करना चाहिए। यदि भविष्य में विद्यार्थियों के करियर और भविष्य के साथ इसी तरह खिलवाड़ किया गया, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) चुप नहीं बैठेगी।उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरकर तीव्र आंदोलन करेगी।


