■ एक सप्ताह में जलभंडार 98.13 प्रतिशत से घटकर 69.29 प्रतिशत दिखाए जाने पर उठे सवाल; छपाई की गलती, पानी के रिसाव या वास्तविक आंकड़े छिपाने की आशंका जताई।
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत भातसा बांध के जलभंडार से संबंधित आंकड़ों में कथित विसंगति को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक में सवाल उठाए गए। पार्षद एवं स्थायी समिति सदस्य तेजिंदर सिंह तिवाना ने प्रशासन की ओर से प्रस्तुत रिपोर्टों में दर्ज आंकड़ों के अंतर पर आपत्ति जताते हुए तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की।


उन्होंने कहा कि मुंबई की जलापूर्ति से जुड़े इस मामले में आंकड़ों की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है और किसी भी तरह की अस्पष्टता से नागरिकों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।तिवाना के अनुसार, स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों में भातसा बांध के उपयोगी जलभंडार को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। 3 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में बांध का उपयोगी जलभंडार 98.13 प्रतिशत यानी 7,03,594 मिलियन लीटर (एमएल) दर्ज किया गया था। वहीं, 10 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह की रिपोर्ट में जलभंडार 69.29 प्रतिशत यानी 6,89,876 मिलियन लीटर बताया गया।इन दोनों रिपोर्टों में जलभंडार के प्रतिशत और मात्रा के बीच अंतर को लेकर तिवाना ने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर एक सप्ताह के भीतर आंकड़ों में इतनी बड़ी विसंगति कैसे सामने आई।


उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि जलभंडार से संबंधित जानकारी स्पष्ट और विश्वसनीय होनी चाहिए, क्योंकि मुंबई की जलापूर्ति लाखों नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी है।‘क्या यह छपाई की गलती है या पानी का रिसाव?’इस मामले पर सवाल उठाते हुए तिवाना ने प्रशासन से पूछा कि क्या यह केवल छपाई की गलती है, बांध से बड़े पैमाने पर पानी का रिसाव हो रहा है या फिर प्रशासन की ओर से जलभंडार की वास्तविक स्थिति की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। हालांकि, ये सवाल और आशंकाएं हैं; उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में पानी के रिसाव या आंकड़े छिपाए जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
तिवाना ने मांग की कि बीएमसी प्रशासन दोनों रिपोर्टों में दर्ज आंकड़ों की जांच करे और स्थायी समिति के साथ मुंबईवासियों को भी वास्तविक स्थिति से अवगत कराए। उन्होंने कहा कि जलभंडार के प्रतिशत और कुल पानी की मात्रा के बीच दिखाई दे रहे अंतर को स्पष्ट करना आवश्यक है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस विसंगति पर समय रहते स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, तो मुंबई की जलापूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सही आंकड़े प्रस्तुत करने चाहिए।
गौरतलब है कि भातसा बांध मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में इसके जलभंडार से संबंधित आंकड़ों में विसंगति सामने आने पर प्रशासन की ओर से तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देना जरूरी है। फिलहाल, तिवाना की प्रेस विज्ञप्ति में उठाए गए सवालों के संबंध में प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक जवाब का विवरण नहीं दिया गया है।


