मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में साइबर पुलिस ने फर्जी मोबाइल ऐप के जरिए लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने और आर्थिक धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


पुलिस के अनुसार, आरोपी ऐसे खतरनाक एंड्रॉयड ऐप तैयार करने और वितरित करने के नेटवर्क से जुड़े थे, जिन्हें वाहन चालान, बिजली बिल या अन्य उपयोगिता सेवाओं से संबंधित आधिकारिक संदेशों की तरह दिखाया जाता था। इन ऐप के जरिए लोगों को अपने मोबाइल फोन में संदिग्ध फाइल डाउनलोड करने के लिए फंसाया जाता था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद आरिफ अंसारी (28), शेख बेलाल (28) और महबूब आलम (26) के रूप में की है।
मुंबई के पूर्व क्षेत्र की साइबर पुलिस ने यह कार्रवाई एक वित्तीय धोखाधड़ी की जांच के दौरान की। जांच में सामने आया कि गिरोह कथित तौर पर देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों को फर्जी ऐप उपलब्ध कराता था। मामले का खुलासा घाटकोपर निवासी एन. ठाक्कर के साथ हुई धोखाधड़ी की जांच के दौरान हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित को 16 से 18 अप्रैल के बीच व्हाट्सऐप पर संदेश भेजे गए। इनमें कहा गया था कि पिछले महीने का गैस बिल अपडेट नहीं होने के कारण रात 10 बजे तक उनका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। संदेश में उन्हें ‘महानगर गैस बिल अपडेट ऑनलाइन’ नाम की एपीके फाइल डाउनलोड करने और डेबिट कार्ड की जानकारी दर्ज करने के लिए कहा गया। इसके बाद कथित तौर पर उनके खाते से 26.12 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई।
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि दिल्ली के कपासहेड़ा निवासी 29 वर्षीय साजिद मंसूर अली उन्हें ये फर्जी ऐप और संभावित पीड़ितों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था। आरोपी व्हाट्सऐप के माध्यम से इन फाइलों को आगे भेजते थे और प्रत्येक सफल इस्तेमाल के बदले उन्हें 8,000 से 10,000 रुपये तक मिलते थे। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े झारखंड के दो अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के तार महाराष्ट्र के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में दर्ज अन्य मामलों से भी जुड़े होने की आशंका है। मामले की जांच जारी है और पुलिस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।ऐसे करें साइबर ठगी से बचावसाइबर अपराधी अक्सर यातायात चालान, बिजली बिल, गैस बिल या सरकारी सेवाओं के नाम पर फर्जी ऐप भेजते हैं। इन्हें मोबाइल में स्थापित करने के बाद वे बैंकिंग संबंधी जानकारी और एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड (ओटीपी) हासिल कर सकते हैं तथा खाते से रकम निकाल सकते हैं।
* व्हाट्सऐप या अनजान नंबर से मिली एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
* यातायात चालान और बिजली या गैस बिल की जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से जांचें।
* किसी अनजान ऐप को बैंकिंग, संदेश और अन्य संवेदनशील जानकारियों की अनुमति न दें।
* यदि खाते से धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।


