मुंबई वार्ता/श्रीश उपाध्याय

संयुक्त फेरीवाला महासंघ, मुंबई द्वारा आज आजाद मैदान में मुंबई के फेरीवालों की विराट आंदोलन हुआ,जिसमें करीब 15000 फेरीवालों ने हिस्सा लिया। इंस अदोलन का नेतृत्व मुंबई के भाजपा हॉकर्स यूनिट मुंबई के अध्यक्ष बाबूभाई भवानजी( Ex डेप्युटी मेयर मुंबई) और संजय यादव ने किया ।


इस आंदोलन में सभी हॉकर्स यूनियन एवं संगठनो ने एक मंच पर एकता दिखाई और शामिल हुए। इस आंदोलन में आजाद हॉकर्स यूनियन के दयाशंकर जी, भाजपा नेता आर यू सिंह, संजय यादव, जितेन्द्र गुप्ता , जितेन्द्र कामले,मापनकर, शिवाजी सुर, जयशंकर दयाशंकर, सलमा शेख, हरिहर यादव,राकेश गुप्ता, इत्यादि ने फेरीवालोकी समस्याएं की जानकारी दी ।


इस आंदोलन के दौरान उपस्थित महाराष्ट्र सरकार के मंत्री उदय सावंत ने कहा कि 24 घंटे में फेरीवालो की समस्या का समाधान किया जाएगा। विधान सभा में फेरीवालों के प्रतिनिधि मंडल ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री शंभुराज देसाई, जी को आवेदन पत्र दिया।
इस प्रतिनिधी मंडल में विधायक कालिदास कोलमकर, विधायक रामकदम, बाबूभाई भवानजी, संजय यादव, आर यू सिंहजी,जयशंकर दयाशंकरजी जितेन्द्र कामले, सलमा शेख ने फेरीवालों की समस्या रखी।
मुंबई जैसे महानगर में पिछले 50 वर्षों से ईमानदारी से अपना व्यवसाय कर रहे लाखों फेरीवालों पर, मुंबई महानगरपालिका एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार अन्यायपूर्ण एवं कठोर कार्रवाई की जा रही है। इन कार्रवाइयों में वर्षों से स्थापित फेरीवालों को बेदखल किया जा रहा है । जिससे उनके जीवन-यापन पर संकट उत्पन्न हो गया है।
■ मुख्य मुद्दे
फेरीवाले हटाओ अभियान पर तत्काल रोक लगे
● पिछले कई दशकों से अनुशासित और वैध रूप से व्यवसाय करने वाले फेरीवालों को सड़क से हटाना अमानवीय और अन्यायपूर्ण है।
● सम्मानपूर्वक जीविकोपार्जन का अधिकार
फेरीवालों ने अपने दम पर व्यवसाय खड़ा किया। अब वही व्यवसाय जबरन बंद क्यों किया जा रहा है ?
● केंद्र व राज्य की नीतियों में विरोधाभास
जहां एक ओर केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’, पीएमईजीपी एवं मुद्रा योजना जैसी पहल के माध्यम से स्व-रोजगार को बढ़ावा देती है, वहीं दूसरी ओर मुंबई महापालिका और पुलिस प्रशासन इन्हीं स्वरोजगारों को अवैध ठहराकर बंद करवा रही है। फेरीवालों को अपराधी की तरह देखा जा रहा है।
● नियमबद्ध फेरीवाला नीति तुरंत लागू हो
हम अनुशासित और व्यवस्थित फेरी व्यवसाय के पक्षधर हैं।महापालिका को फेरीवालों को लाइसेंस देने चाहिए और निर्धारित शुल्क के माध्यम से राजस्व अर्जित करना चाहिए। जिससे नगर निगम को सैकड़ों करोड़ की आय हो सकती है।
● महंगाई को नियंत्रित रखने वाले फेरीवाले
मुंबई, ठाणे, कल्याण सहित उपनगरों में रहने वाला 80% गरीब एवं मध्यम वर्ग दैनिक आवश्यक वस्तुएं.जैसे कपड़े, सब्ज़ियां, फल, किराना आदि फेरीवालों से ही खरीदता है। मॉल या ब्रांडेड दुकानों से खरीदारी उनकी आर्थिक पहुंच से बाहर है। मुंबई का आम नागरिक फेरीवालों पर निर्भर है। वहीं महाराष्ट्र के पालघर, रायगढ़ जैसे जिलों के किसान सीधे मुंबई में कृषि उत्पाद बेचते हैं। अब उन्हें भी रोका जा रहा है।हम रोजगार उत्पन्न करने वाले हैं। हम उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर वस्तुएं उपलब्ध कराते हैं, किसानों को सीधा बाजार उपलब्ध कराते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं।
● फेरीवालों की प्रमुख मांगें
हमें हमारा वैध व्यवसाय निर्बाध रूप से जारी रखने दिया जाए*सभी पात्र फेरीवालों को लाइसेंस एवं स्थान आवंटित किए जाएं।
हम अनुशासित एवं नियमबद्ध व्यवसाय हेतु पूर्णतः तैयार हैं। वर्षों से स्थापित फेरीवालों को बेवजह बेदखल न किया जाए। अवैध अतिक्रमण और घुसपैठ पर सख्त कार्यवाही की जाए।
● फेरीवालो का रुख स्पष्ट है
“भीख नहीं मांगते – न्याय मांगते हैं। फेरीवाले स्वाभिमानी हैं, आत्मनिर्भर हैं । यह फेरीवाले हैं। फेरीवालों को व्यवसाय सम्मानपूर्वक करने दिया जाए।”


