■ एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल क्यों? पुलिसकर्मियों पर ॲट्रोसिटी कानून के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार करें.
मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य की पुलिस व्यवस्था ‘होकर भी नहीं है’ जैसी स्थिति में पहुंच गई है। अपराधी खुलेआम घूमते हैं और पुलिस आम जनता पर ही कानून का डंडा चलाती है। पुणे के कोथरुड पुलिस द्वारा तीन युवतियों के घर में जबरन घुसकर उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लेना, जातिसूचक गालियां देना और मारपीट करना, यह घटना अत्यंत निंदनीय है। जिन्होंने यह अत्याचार किया, उन पुलिसकर्मियों पर अब तक मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया? उनके खिलाफ अनुसूचित जाति-जमाती अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत तत्काल केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए, ऐसी मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की है।


इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि एक महिला की मदद करने के कारण इन तीन सामाजिक कार्यकर्ता युवतियों के घर में घुसकर पुलिस ने यह दमनकारी कार्रवाई की। सवाल यह है कि इन बेलगाम पुलिसकर्मियों को संरक्षण कौन दे रहा है? क्या पुणे के पुलिस आयुक्त केवल कुर्सी पर बैठकर आराम कर रहे हैं? पुलिस किस दबाव में काम कर रही है? तीन युवतियों पर पुलिस अत्याचार करती है और फिर भी कार्रवाई नहीं होती। एफआईआर दर्ज करने में किस शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है? राज्य के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा पुणे के पालकमंत्री को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से दखल देकर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।


पुणे में खुलेआम ड्रग्स का काला बाज़ार चल रहा है, ‘कोयता गैंग’ का आतंक जारी है, और पुलिस इन पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। खुद मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि पुणे में दादागिरी बढ़ गई है, लेकिन कार्रवाई करने से वे भी पीछे हट रहे हैं। ऐसे लाचार मुख्यमंत्री का क्या उपयोग? पुणे पुलिस को आम जनता पर कानून का गलत इस्तेमाल करने के बजाय शहर में फैले अवैध धंधों और बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने की जरूरत है, ऐसा तीव्र वक्तव्य हर्षवर्धन सपकाल ने दिया।


