मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

मुंबई की झोपड़पट्टियों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले छोटे कारोबारियों के लिए एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। शिव श्रमिक कामगार संघटना ने महाराष्ट्र सरकार के 2023 के शासन निर्णय (जीआर) में अनिवासी (व्यावसायिक) झोपड़ियों के सशुल्क पुनर्वास की पात्रता रद्द करने पर कड़ा विरोध जताया है। संघटना ने इस फैसले को लाखों छोटे व्यवसायियों और उनके परिवारों के लिए बेरोजगारी का संकट बताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है।


संघटना के महासचिव संदीप मालतीदेवी त्रिलोकीनाथ शुक्ला ने कहा कि 2018 के जीआर के तहत अनिवासी गालाधारकों को सशुल्क पुनर्वास का लाभ मिलता था, लेकिन 2023 के जीआर (क्रमांक: सांकीर्ण-2022/प्र.क्र.54(भाग-1)/झोपसु-1, दिनांक 25 मई 2023) ने इसे केवल निवासी झोपड़ियों तक सीमित कर दिया है। इसमें 2.5 लाख रुपये की योजना की सीमा तय की गई है, जबकि अनिवासी झोपड़ियों की पात्रता पूरी तरह रद्द कर दी गई।
शुक्ला ने चेतावनी दी कि यह फैसला छोटे दुकानदारों, कारखानेदारों और लघु उद्यमियों को आर्थिक संकट में धकेल देगा, जिससे पहले से विकट बेरोजगारी की स्थिति और गंभीर हो जाएगी। उन्होंने कहा, “यह निर्णय लाखों परिवारों को सड़क पर ला देगा।”पत्र में संघटना ने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, अनिवासी झोपड़ियों के लिए एक अलग सशुल्क पुनर्वास योजना शुरू की जाए, जिसमें न्यूनतम लेकिन निवासी से अधिक सशुल्क खर्च तय किया जाए। इससे व्यवसायियों को गाला मिलकर रोजगार बचा रहेगा। दूसरी, सरकार तत्काल स्पष्टीकरण जारी करे और अस्वीकृत आवेदनों की समीक्षा करे।
शुक्ला ने आगे कहा, “यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हमें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। मुंबई के झोपड़पट्टीवासी और कामगार एकजुट होकर न्याय की मांग करेंगे। सरकार को ‘सभी के लिए घर’ अभियान के उद्देश्य के अनुरूप अनिवासी व्यवसायियों को भी न्याय देना चाहिए।”एसआरए नीतियों के अनुसार, 1 जनवरी 2000 से पहले की अनिवासी संरचनाएं मुफ्त पुनर्वास के लिए पात्र हैं, क्योंकि इन्हें “संरक्षित कब्जेदार” माना जाता है।
हालांकि, 1 जनवरी 2000 से 1 जनवरी 2011 के बीच की अनिवासी संरचनाएं पहले 2018 के जीआर के तहत सशुल्क पुनर्वास के लिए पात्र थीं, लेकिन 2023 के जीआर ने अनिवासी के लिए इस पात्रता को रद्द कर दिया है। वर्तमान में ये केवल विशेष मामलों या परियोजनाओं (जैसे धारावी रीडेवलपमेंट) में विचार की जा सकती हैं, अन्यथा नहीं।< 2025 की आवास नीति में भी अनिवासी के लिए कोई नई अलग योजना या बदलाव नहीं किया गया है, हालांकि मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड-यूज) विकास को प्रोत्साहन दिया गया है।शिव श्रमिक कामगार संघटना मुंबई में कामगारों, झोपड़पट्टीवासियों और लघु उद्यमियों के अधिकारों के लिए लंबे समय से सक्रिय है।
इस मुद्दे पर संघटना सरकार के साथ लगातार सहयोग कर रही है। अधिक जानकारी के लिए महासचिव संदीप मालतीदेवी त्रिलोकीनाथ शुक्ला से संपर्क किया जा सकता है- मोबाइल: 9930853707, ईमेल: sskamsangh@gmail.com।
यह मांग ऐसे समय में उठी है जब मुंबई में झोपड़पट्टी पुनर्वास योजनाएं जैसे धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनिवासी संरचनाओं को नजरअंदाज करने से शहर की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। सरकार की ओर से अभी इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


