■ स्टाइपेंड ₹18 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग; दिवाली के बाद निर्णय लेने का प्रशासन का आश्वासन।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र के एमबीबीएस पाठ्यक्रम के इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि सहित उनकी विभिन्न समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) लगातार प्रयासरत है। अभाविप ने मांग की है कि सरकारी एवं अनुदानित मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड ₹18,000 से बढ़ाकर ₹30,000 किया जाए। साथ ही, निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं पर रोक लगाई जाए तथा सभी इंटर्न डॉक्टरों को नियमानुसार समय पर स्टाइपेंड मिलना सुनिश्चित किया जाए। इन मांगों को लेकर अभाविप द्वारा मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा गया है।


अभाविप के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप आज बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय में सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष श्री हरीश बांधिर्गे की उपस्थिति में एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुंबई के मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाता, संबंधित कॉलेजों के छात्र प्रतिनिधि तथा अभाविप के पदाधिकारी उपस्थित रहे।बैठक में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि तथा निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।


प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि स्टाइपेंड वृद्धि के प्रस्ताव को आर्थिक एवं कानूनी पहलुओं की जांच के लिए संबंधित विभाग के पास भेजा जाएगा तथा दिवाली के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा।चिकित्सा शिक्षा के अंतिम चरण में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों को मरीजों की प्रत्यक्ष देखभाल, आपातकालीन सेवाओं और विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। अस्पतालों में उनके कार्य और जिम्मेदारियों को देखते हुए वर्तमान में दिया जा रहा ₹18,000 का मासिक स्टाइपेंड अपर्याप्त है। वहीं, निजी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों को समय पर स्टाइपेंड नहीं मिलने और भुगतान में अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
अभाविप ने मांग की है कि स्टाइपेंड वृद्धि के साथ-साथ निजी मेडिकल कॉलेजों में इन अनियमितताओं को दूर करने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए।इस अवसर पर अभाविप मुंबई महानगर मंत्री अभिषेक पवार ने कहा, “एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अस्पतालों में मरीजों की प्रत्यक्ष देखभाल की बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड उनके कार्य और जिम्मेदारियों की तुलना में अपर्याप्त है। स्टाइपेंड को ₹18,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि इंटर्न डॉक्टरों के कार्य और जिम्मेदारियों को उचित सम्मान देने का विषय है।
इस मुद्दे पर प्रशासन के साथ प्रत्यक्ष बैठक हो और विद्यार्थियों की समस्याएं संबंधित अधिकारियों तक पहुंचें, इसके लिए अभाविप लगातार प्रयास कर रही है। आज की बैठक इसी प्रयास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, केवल आश्वासन से यह समस्या हल नहीं होगी। दिवाली के बाद स्टाइपेंड वृद्धि पर ठोस निर्णय लेकर उसे लागू किया जाना चाहिए। जब तक विद्यार्थियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, अभाविप का प्रयास और संघर्ष जारी रहेगा।”
अभाविप की स्पष्ट मांग है कि एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि की जाए और निजी मेडिकल कॉलेजों में भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं को दूर किया जाए। विद्यार्थियों की मांगों पर ठोस निर्णय लेकर उनका क्रियान्वयन होने तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इंटर्न डॉक्टरों के साथ खड़ी रहेगी और लगातार प्रयास करती रहेगी।


