मुंबई वार्ता संवाददाता

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर में तैनात दो अधिकारियों के खिलाफ मुंबई के एक कारोबारी से कथित तौर पर 2.25 करोड़ रुपये की जबरन वसूली करने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को इसकी जांच सौंप दी गई है। एफआईआर गोरेगांव के बांगुर नगर पुलिस थाने में दर्ज की गई है।


शिकायतकर्ता अमूल्य वसा, जो विंट्री टेक प्राइवेट लिमिटेड के मालिक हैं, के अनुसार 20 जुलाई को दो व्यक्ति मलाड पश्चिम स्थित माइंडस्पेस के केन प्लाजा स्थित उनके कार्यालय पहुंचे। दोनों ने खुद को जयपुर ईडी का सहायक निदेशक मोहित गर्ग (36) और प्रवर्तन अधिकारी देवेंद्र गुप्ता (35) बताया। उन्होंने कारोबारी से उसके व्यवसाय के बारे में पूछताछ की और उस पर अपराध से अर्जित धन से जुड़े लेनदेन में शामिल होने का आरोप लगाया।
शिकायत के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कोई संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए बिना कारोबारी के कार्यालय में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई करने तथा गिरफ्तारी की धमकी दी। आरोप है कि उन्होंने कारोबारी की प्रतिष्ठा खराब करने और उसके निजी जीवन तथा सहयोगियों से जुड़ी जानकारी का भी हवाला दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शुरुआत में उससे 5 करोड़ रुपये की मांग की गई, लेकिन बाद में यह रकम घटाकर 2.25 करोड़ रुपये कर दी गई। कथित तौर पर रकम नहीं देने पर कड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी दी गई। उसी शाम मलाड के एक रेस्तरां में कारोबारी और उसके सहयोगी की दोनों आरोपियों के साथ बातचीत हुई। इसके बाद अगले दिन कारोबारी ने कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये दिए।
इसके बाद आरोपियों ने दावा किया कि वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी से मामला बंद कर दिया गया है। जब कारोबारी ने इसका दस्तावेजी प्रमाण मांगा तो उसे कथित तौर पर बताया गया कि फाइल की वास्तविक पुष्टि केवल दिल्ली में की जा सकती है। 25 जुलाई को कारोबारी के दो सहयोगी दिल्ली के एक मॉल में आरोपियों से मिले। वहां कथित तौर पर एक दस्तावेज दिखाया गया, जिसके बाद बाकी 1.25 करोड़ रुपये भी दिए गए।
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि रकम लेने के बाद दोनों अधिकारियों ने अतिरिक्त पैसे की मांग शुरू कर दी। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वरिष्ठ अधिकारी इस भुगतान से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें भी पैसे देने होंगे। इतना ही नहीं, नियमित रूप से हर महीने रकम देने की मांग किए जाने का भी आरोप है।
बाद में कारोबारी ने दस्तावेजों की जांच और अपने परिचितों से जानकारी लेने के बाद महसूस किया कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है और उससे 2.25 करोड़ रुपये की कथित जबरन वसूली की गई है।
अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में शिकायत में नामजद दोनों व्यक्तियों के वास्तव में ईडी अधिकारी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम, कथित भुगतान और दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।


