मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में शनिवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब द्रमुक सांसद और पार्टी की वरिष्ठ नेता कनिमोझी करुणानिधि ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से उनके बांद्रा स्थित आवास ‘मातोश्री’ पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक चर्चा हुई। हालांकि, इस बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।


यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब तमिलनाडु की राजनीति में द्रमुक और कांग्रेस के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में कनिमोझी का सीधे उद्धव ठाकरे से मिलने पहुंचना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कनिमोझी करुणानिधि द्रमुक की प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं और संसद में पार्टी का महत्वपूर्ण चेहरा हैं। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे विपक्षी राजनीति में महाराष्ट्र के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बंद कमरे में हुई करीब 45 मिनट की बातचीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के बीच विपक्षी गठबंधन की राजनीति लंबे समय से चर्चा में रही है। हाल के महीनों में सीटों के बंटवारे, स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और गठबंधन की रणनीति को लेकर सहयोगी दलों के बीच मतभेद भी सामने आते रहे हैं। ऐसे माहौल में द्रमुक नेता की ठाकरे से मुलाकात ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि कनिमोझी और उद्धव ठाकरे की बैठक किसी नए राजनीतिक समीकरण या गठबंधन की दिशा में कदम है। दोनों नेताओं की ओर से बैठक के एजेंडे या किसी संभावित राजनीतिक समझौते को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात को लेकर कनिमोझी, द्रमुक या शिवसेना (यूबीटी) की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं। फिलहाल 45 मिनट की यह मुलाकात महाराष्ट्र और तमिलनाडु की विपक्षी राजनीति के बीच संभावित नए संवाद को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।


