मुंबई वार्ता संवाददाता

कुर्ला पश्चिम के अशोक नगर में पहाड़ी का हिस्सा चॉल पर गिरने से चार लोगों की मौत के मामले में मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने बीएमसी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह महज दुर्घटना नहीं, बल्कि बीएमसी की लापरवाही से हुई मौतें हैं। उन्होंने हादसे की जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि मानसून के दौरान इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आती हैं, लेकिन हादसा होने के बाद ही प्रशासन की नींद खुलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएमसी ने मानसून से पहले खतरनाक और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
अप्रैल में ही खतरनाक इलाकों के ऑडिट की मांग की थी
सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि उन्होंने अप्रैल में ही कुर्ला पश्चिम और घाटकोपर पश्चिम के खतरनाक इलाकों का उचित सुरक्षा ऑडिट कराने तथा वहां सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की थी। इसके बाद जुलाई की शुरुआत में उन्होंने उपनगर जिलाधिकारी को भी इस संबंध में स्मरण पत्र भेजा था। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और अब चार निर्दोष लोगों की जान चली गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कितने और लोगों की जान जाने के बाद बीएमसी प्रशासन जागेगा? उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन बुनियादी ढांचे के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन आम नागरिकों की जान बचाने वाले जरूरी कामों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
चेंबूर की घटनाओं का भी दिया हवाला
वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि इस मानसून में चेंबूर में पेड़ स्कूल बस पर गिरने से एक स्कूली बच्चे की मौत हुई थी। इसके अलावा खुले मैनहोल में गिरने से भी एक व्यक्ति की जान गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं से भी बीएमसी ने कोई सबक नहीं लिया। चेंबूर में पेड़ गिरने की घटना में भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना होने के बाद प्रशासन सक्रिय हो जाता है, लेकिन मानसून पूर्व तैयारियां व्यवस्थित तरीके से नहीं की जातीं और पूरी तैयारी कागजों तक सीमित रह जाती है। जब तक ऐसी दुर्घटनाओं के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक प्रशासन इन मामलों को गंभीरता से नहीं लेगा।
भूस्खलन संभावित सभी इलाकों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग
वर्षा गायकवाड़ ने बीएमसी से मुंबई के सभी भूस्खलन संभावित और असुरक्षित क्षेत्रों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट तत्काल कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि खतरनाक स्थानों पर रहने वाले परिवारों की पहचान कर जरूरत के अनुसार उनका सुरक्षित पुनर्वास या स्थानांतरण किया जाना चाहिए।
उन्होंने खतरनाक पेड़ों और उनकी शाखाओं का वार्ड स्तर पर वैज्ञानिक ऑडिट कराने की भी मांग की। खतरनाक घोषित किए गए पेड़ों पर तत्काल आवश्यक छंटाई और अन्य सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण, खुदाई, कंक्रीटीकरण, यूटिलिटी अथवा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण पेड़ों की जड़ों या उनकी स्थिरता को कोई खतरा तो नहीं पैदा हुआ है, इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
वर्षा गायकवाड़ ने मांग की कि असुरक्षित क्षेत्रों, पेड़ों से जुड़े खतरों और मानसून पूर्व तैयारियों के सुरक्षा ऑडिट की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में ऐसी जानलेवा घटनाओं को रोका जा सके।


