सुरेश मिश्र/कवि/मुंबई वार्ता

मंदिरों को तोड़ा,नहीं छोड़ा कभी हिंदुओं को
उनका खल बार-बार बनता बावर्ची
सनातन की आस्था से खिलवाड़ करता है
यूं बक रहा है जैसे बकते हैं ठरकी


सैफई नचनियों पे अरबों लुटाने वाला
दीप उत्सव को बता रहा फिजूलखर्ची ।
सनातनी जब-जब करते हैं धर्म-कर्म
तब टोंटी चोरवा को लगती है मरची ।




