श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता



वर्षा गायकवाड ने धारावी पुनर्विकास योजना के सर्वेक्षण में बड़े घोटाले और वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के नाम पर स्थानीय लोगों को बेघर कर उद्योगपति गौतम अडानी के लिए टावर खड़े करने की तैयारी की जा रही है।


गायकवाड ने कहा कि सरकार दावा करती है कि धारावी के लोगों को वहीं घर दिए जाएंगे, लेकिन हकीकत इससे अलग है। हाल ही में जारी Annexure-2 सूची में करीब 96% निवासियों को ‘अनियमित’ या ‘अयोग्य’ घोषित कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वेक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है और पात्रता दिलाने के नाम पर स्थानीय लोगों से लाखों रुपये की वसूली की जा रही है।


लोकसभा में मुद्दा उठाते हुए गायकवाड ने कहा कि कांग्रेस ने 2004 में धारावी के विकास की परिकल्पना की थी, ताकि एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी के लोगों को सम्मानजनक जीवन मिल सके। लेकिन वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि निविदा प्रक्रिया में फेरबदल कर इसे “सरकार के करीबी उद्योगपति” के फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यह धारावी का विकास है या अडानी का?


गायकवाड ने आगे कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि 1 जनवरी 2011 से पहले धारावी में रहने वाले सभी लोगों को पात्र माना जाए। इसके बावजूद सर्वे रिपोर्ट में बेहद कम लोगों को पात्र ठहराया गया है।उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक हजार लोगों में सिर्फ 31 को ही पात्र घोषित किया गया। मेघवाड़ी में 505 में से 55 और नाइक नगर में 2229 में से केवल 21 लोगों को ही योग्य माना गया है।
गायकवाड के अनुसार, पात्रता दिलाने के नाम पर दलाल सक्रिय हैं और स्थानीय निवासियों से भारी रकम वसूली जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुर्ला, मालवणी, मुलुंड डंपिंग ग्राउंड, मिठागर और अन्य स्थानों की करीब 1500 एकड़ जमीन इस परियोजना से जुड़ी हुई है, जिससे लोगों में जबरन विस्थापन का डर बढ़ गया है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ DRP के सीईओ से तत्काल हस्तक्षेप कर इस कथित वसूली और अनियमितताओं को रोकने की मांग की है।


