पूरी परियोजना पूरी होने तक प्रतीक्षा आवश्यक नहीं: पूर्ण विंग की सहकारी समिति का पंजीकरण रोका नहीं जा सकता – बॉम्बे हाईकोर्ट।

Date:

मुंबई वार्ता संवाददाता

एक महत्वपूर्ण फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी परियोजना का एक विंग पूर्ण होकर उसमें कब्जा दे दिया गया है, तो उसकी सहकारी आवासीय समिति (को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी) का पंजीकरण पूरी परियोजना के समाप्त होने तक टाला नहीं जा सकता। अदालत ने मुलुंड पश्चिम स्थित एक इमारत की सोसाइटी का पंजीकरण रद्द करने संबंधी सहकारिता मंत्री और विभागीय संयुक्त निबंधक (डीजेआर) के आदेशों को रद्द कर दिया।

यह मामला 360 डिग्री बिज़नेस पार्क प्रिमाइसेस को-ऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़ा है, जो मुलुंड पश्चिम की ब्राइट बिल्डिंग के लिए गठित की गई थी। यह 10 मंज़िला इमारत वर्ष 2007 में बनी थी और अगस्त 2013 में इसे पूर्ण अधिभोग प्रमाणपत्र (ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट) प्राप्त हुआ था। डेवलपर ब्राइट टूल्स प्राइवेट लिमिटेड ने इसमें कुल 44 इकाइयाँ बेची थीं।टी-वार्ड के जिला उप-निबंधक (डीडीआर) ने इस सोसाइटी का पंजीकरण किया था, लेकिन बाद में विभागीय संयुक्त निबंधक ने यह कहते हुए इसे रद्द कर दिया कि उसी भूखंड पर दो अन्य विंगों का निर्माण अभी शेष है।

दरअसल, इमारत के पूर्ण होने और कब्जा दिए जाने के बावजूद सोसाइटी का गठन नहीं किया गया था। इसके चलते 31 फ्लैट खरीदारों ने नवंबर 2022 में टी-वार्ड के डीडीआर से सोसाइटी के पंजीकरण की मांग की, जिसे 28 अप्रैल 2023 को मंज़ूरी मिल गई।डेवलपर ने इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि भूखंड पर प्रस्तावित दो अन्य विंगों के निर्माण के कारण पूरी परियोजना पूरी होने से पहले सोसाइटी का पंजीकरण नहीं किया जा सकता। साथ ही उसने यह भी दावा किया कि बिक्री समझौतों के अनुसार केवल डेवलपर को ही पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार है।

डेवलपर की अपील स्वीकार करते हुए डीजेआर ने सोसाइटी का पंजीकरण रद्द कर दिया और सहकारिता मंत्री ने भी सोसाइटी की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद सोसाइटी ने हाईकोर्ट का रुख किया।

न्यायमूर्ति अमित बोर्कर की एकल पीठ ने डीजेआर और सहकारिता मंत्री दोनों के आदेशों को निरस्त करते हुए सोसाइटी का पंजीकरण बहाल कर दिया।

अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र ओनरशिप ऑफ फ्लैट्स (मोफा) अधिनियम की धारा 10 के तहत, न्यूनतम आवश्यक संख्या में खरीदारों के कब्जा लेते ही प्रमोटर पर सहकारी समिति गठित करने का दायित्व आ जाता है।

अदालत ने टिप्पणी की,“कानून प्रमोटर को भविष्य में होने वाले निर्माण के आधार पर इस दायित्व को टालने की अनुमति नहीं देता।”न्यायमूर्ति बोर्कर ने डेवलपर का यह तर्क भी खारिज कर दिया कि यदि भविष्य की इमारतों को जोड़ा जाए तो 51 प्रतिशत सदस्यता की शर्त पूरी नहीं होती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शर्त केवल मौजूदा, कब्जायोग्य इकाइयों पर लागू होती है।

“काल्पनिक इकाइयों या भविष्य के खरीदारों को गिनना कानून के उद्देश्य को विफल करता है,” अदालत ने कहा।

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि संबंधित तिथि पर 44 में से 31 फ्लैट खरीदारों ने आवेदन पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे वैधानिक सीमा पूरी होती है।इसके अलावा, अदालत ने मंत्री और डीजेआर की उस दलील को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि स्वीकृत लेआउट प्लान में तीन विंग और साझा सुविधाएँ होने के कारण पंजीकरण संभव नहीं है।

अदालत के अनुसार, ऐसा तर्क मोफा अधिनियम की मंशा के विपरीत है।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला,“यदि इस तरह की दलील स्वीकार की जाए, तो डेवलपर बहु-चरणीय परियोजनाओं की योजना बनाकर अनिश्चित काल तक सोसाइटी के गठन को टाल सकता है, जो मोफा के संरक्षणात्मक ढांचे के अनुरूप नहीं है।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

प्रमुख खबरे

More like this
Related

दामिनी दस्ते की तत्परता हिट एंड रन का आरोपी दबोचा।

मुंबई वार्ता/विपिन शुक्ल महात्मा फुले चौक थाना क्षेत्र में...

भाजपा युवा नेता डॉ नितेश राजहंस सिंह का कान्यकुब्ज ब्राह्मण मंडल ने किया भव्य सत्कार।

मुंबई वार्ता संवाददाता कान्यकुब्ज ब्राह्मण मंडल मुंबई द्वारा भाजपा...

कल्याण में ‘नोट बदल’ के नाम पर 5 लाख की लूट 8 आरोपी गिरफ्तार।

मुंबई वार्ता/विपिन शुक्ल नोट बदलकर ज्यादा रकम दिलाने का...